नवगछिया। सिंघिया-मकंदपुर से नवगछिया बाजार को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर बारिश के बाद लगातार जलजमाव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। महत्वपूर्ण मार्ग होने के बावजूद सड़क पर जगह-जगह पानी जमा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क से प्रतिदिन करीब 50 हजार लोगों की आवाजाही होती है।
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यह मार्ग आदर्श थाना नवगछिया, महिला थाना, कई सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों को बाजार से जोड़ता है। ऐसे में सड़क पर लंबे समय से बने जलजमाव से आम लोगों के साथ छात्र-छात्राओं और सरकारी कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कॉलेज जाने वाली छात्राओं की बढ़ी परेशानी
जलजमाव का सबसे अधिक असर मदन अहिल्या महिला कॉलेज आने-जाने वाली छात्राओं और कर्मचारियों पर पड़ रहा है। सड़क पर पानी जमा रहने के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है। बाइक और साइकिल सवारों को भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई जगह सड़क की स्थिति पहले से खराब है। पानी जमा होने के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के गिरने और दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
एक साल पहले हुआ था रखरखाव, फिर बिगड़ी सड़क
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क का रखरखाव करीब एक वर्ष पहले ही कराया गया था। इसके बावजूद कम समय में सड़क की स्थिति दोबारा खराब होने लगी है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि घटिया निर्माण या रखरखाव के कारण सड़क टिक नहीं पाई।
बारिश के दौरान जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहने के कारण सड़क की सतह भी लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है।
स्थायी जल निकासी की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से सड़क की स्थिति की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल गड्ढों की मरम्मत कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सड़क पर जलजमाव रोकने के लिए स्थायी जल निकासी व्यवस्था जरूरी है।
लोगों ने गुणवत्तापूर्ण तरीके से सड़क की मरम्मत कराने और जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी की भी मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह महज एक सड़क नहीं है, बल्कि थाना, महिला थाना, कॉलेज, सरकारी कार्यालयों और नवगछिया बाजार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसलिए यहां जलजमाव और सड़क की खराब स्थिति का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सड़क की स्थिति सुधारने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।
