भागलपुर: जिले में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर अब सरकारी विद्यालयों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है। सुल्तानगंज, रंगरा चौक, नाथनगर, नारायणपुर, इस्माईलपुर और गोपालपुर प्रखंडों के 26 सरकारी विद्यालय बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब छह हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है।
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बाढ़ प्रभावित विद्यालयों को नजदीकी सुरक्षित विद्यालयों से शिफ्ट कर टैग किया गया है। इसके साथ ही संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों, मध्याह्न भोजन योजना के रसोइयों और आवश्यक संसाधनों को भी वैकल्पिक स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें मध्याह्न भोजन और विद्यालय की अन्य सुविधाएं भी मिलती रहेंगी।
इन स्कूलों को किया गया टैग
शिक्षा विभाग ने बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के लिए नजदीकी सुरक्षित स्कूलों को वैकल्पिक केंद्र बनाया है। इनमें—

- प्राथमिक विद्यालय बोचाही दियारा को प्राथमिक विद्यालय बोचाही से टैग किया गया है।
- मध्य विद्यालय बासगरा और प्राथमिक विद्यालय विनोबा टोला को मध्य विद्यालय मोती टोला से जोड़ा गया है।
- मध्य विद्यालय मदहट टोला को मध्य विद्यालय छोटू सिंह टोला से टैग किया गया है।
- प्राथमिक विद्यालय मेघल टोला को प्राथमिक विद्यालय डोमासी टोला से जोड़ा गया है।
इसी तरह अन्य बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के लिए भी सुरक्षित वैकल्पिक विद्यालय निर्धारित किए गए हैं।
बाढ़ के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की तैयारी
शिक्षा विभाग की इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ के कारण स्कूल भवन प्रभावित होने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद न हो। प्रभावित विद्यालयों के शिक्षकों और एमडीएम से जुड़े रसोइयों को भी वैकल्पिक स्कूलों में भेजे जाने से बच्चों को पहले की तरह शैक्षणिक और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है।
सभी बाढ़ प्रभावित स्कूलों पर नजर
डीईओ चंदन कुमार ने बताया कि सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को बाढ़ प्रभावित विद्यालयों पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों को बाढ़ के कारण दूसरे सुरक्षित स्कूलों में शिफ्ट किया गया है, वहां विद्यार्थियों को मूल विद्यालय की तरह उपलब्ध सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी।
गंगा और कोसी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच शिक्षा विभाग की नजर संवेदनशील विद्यालयों पर बनी हुई है। स्थिति के अनुसार आगे भी विद्यालयों के संचालन और वैकल्पिक व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।
