गंगा ने बदली चाल, दशकों पुराने रास्ते पर लौट रही नदी; राघोपुर-काजीकोरैया बांध पर मंडराया भीषण कटाव का खतरा
भागलपुर से संजय कुमार-मुख्य की रिपोर्ट: भागलपुर में गंगा अब अपनी पुरानी चाल में लौटती नजर आ रही है। जल संसाधन विभाग के ताजा सर्वेक्षण में नदी के बदलते बहाव को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। विभागीय तकनीकी अध्ययन के मुताबिक गंगा अब टेढ़े-मेढ़े वर्तमान मार्ग को छोड़कर दशकों पुराने मूल एलायनमेंट की ओर बढ़ रही है, जहां कभी नदी की मुख्य धारा बहा करती थी।
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नदी के इस बदलते रुख ने राघोपुर-काजीकोरैया मार्जिनल बांध पर कटाव का खतरा और बढ़ा दिया है। नदी की मुख्य धारा के पुराने मार्ग की ओर लौटने से तटबंध और तटीय इलाके सीधे उसकी चपेट में आ रहे हैं।
सबौर में डूब क्षेत्र की बसावट बनी बड़ी चुनौती
विभागीय सर्वेक्षण के अनुसार, सबौर के डूब क्षेत्र में पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर मानवीय बसावट और निर्माण हो चुके हैं। ऐसे में जब गंगा अपने पुराने बहाव क्षेत्र की ओर बढ़ रही है तो नदी को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।

बहाव क्षेत्र के संकरा होने से पानी का दबाव सीधे किनारों और तटबंधों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि सबौर और आसपास के तटीय इलाकों में भूमि कटाव तेजी से बढ़ रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों और पुराने नक्शों से खुला नदी का राज
जल संसाधन विभाग की विशेष तकनीकी टीम ने कुछ महीने पहले राघोपुर से काशीकोरैया और सबौर तक के तटीय क्षेत्र का अध्ययन किया था। इस दौरान सैटेलाइट इमेज और पुराने नक्शों का मिलान किया गया।
अध्ययन में सामने आया कि गंगा का वर्तमान बहाव उस क्षेत्र के काफी करीब पहुंच गया है, जहां दशकों पहले नदी की मुख्य धारा हुआ करती थी। इससे यह स्थिति बन गई है कि कई स्थानों पर सुरक्षा के लिए बनाए गए तटबंध अब नदी की धारा अथवा उसके मुहाने के बेहद करीब आ गए हैं।
‘इस बार गंगा का मिजाज बदला हुआ है’
राघोपुर दियारा निवासी मुकेश मंडल ने कहा कि हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार गंगा का मिजाज अलग दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि समय रहते बड़ी मशीनों के जरिए कटाव रोकने का काम शुरू किया जाना चाहिए था।
काशीकोरैया की शकुंतला देवी ने कहा कि नदी अब उनके घरों से कुछ ही मीटर दूर रह गई है। दिन-रात मिट्टी कटने की आवाज सुनाई देती है। उन्होंने कहा कि परिवार के बच्चों और बुजुर्गों को लेकर चिंता बनी हुई है।
उनका कहना है कि सरकार सर्वे जरूर कर रही है, लेकिन प्रभावित लोगों को सर्वे नहीं बल्कि तत्काल सुरक्षा चाहिए। कटाव रोकने के लिए वर्तमान में किए जा रहे इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं।
ग्रामीणों ने मांगा स्थायी समाधान
सबौर के इंग्लिश निवासी रामचंद्र यादव ने कहा कि केवल बोरे डालकर बांध बचाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। सरकार को बड़े और मजबूत सुरक्षा इंतजाम करने होंगे, वरना आने वाले समय में पूरा इलाका गंगा की चपेट में आ सकता है।
ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि यदि नदी का बहाव इसी दिशा में आगे बढ़ता रहा तो कई दियारा क्षेत्र और तटीय बस्तियों पर अस्तित्व का संकट पैदा हो सकता है।
बदलते नदी भूगोल के हिसाब से बनेगी नई रणनीति
जल संसाधन विभाग अब गंगा के बदलते प्राकृतिक बहाव को ध्यान में रखते हुए तटबंधों की सुरक्षा की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में जुटा है। विभाग का मानना है कि बाढ़ और कटाव के बदलते पैटर्न को समझे बिना केवल तत्काल राहत वाले सुरक्षा कार्य लंबे समय तक प्रभावी नहीं रहेंगे।
मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान ने कहा कि विभाग का प्रयास है कि नदी के इस प्राकृतिक बदलाव को ध्यान में रखते हुए तटबंधों को सुरक्षित रखने की ठोस योजना तैयार की जाए। इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम किया जा रहा है।
राघोपुर-काजीकोरैया से लेकर सबौर तक गंगा के बदलते बहाव ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गंगा को उसके पुराने रास्ते पर लौटने से रोका जा सकता है, या फिर तटबंधों और बस्तियों की सुरक्षा के लिए नई रणनीति बनानी होगी?
