गोपालपुर। गंगा की विनाशकारी बाढ़ ने गोपालपुर प्रखंड में लोगों की जिंदगी और आशियानों के साथ अब मृतकों के अंतिम संस्कार पर भी संकट खड़ा कर दिया है। तिनटंगा करारी स्थित प्रमुख श्मशान घाट पूरी तरह गंगा के पानी में डूब गया है। घाट परिसर में तीन से चार फीट पानी और भारी कीचड़ जमा होने के कारण शवों के अंतिम संस्कार के लिए सूखी जमीन तक उपलब्ध नहीं है।
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ऐसे में अपनों को खोने के गम के बीच परिजनों के सामने उन्हें अंतिम विदाई देने की बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। बाढ़ के कारण घाट तक पहुंचना भी मुश्किल है और घाट पहुंचने के बाद चिता सजाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल रही है।
चार जिलों के लोगों के लिए प्रमुख मोक्षधाम
तिनटंगा करारी का श्मशान घाट केवल गोपालपुर प्रखंड ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण अंतिम संस्कार स्थल माना जाता है। गंगा तट की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के कारण भागलपुर के अलावा पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा से भी लोग यहां शवदाह के लिए पहुंचते हैं।

गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद घाट का पक्का और कच्चा दोनों हिस्सा जलमग्न हो गया है। पानी से बाहर दिखाई देने वाले थोड़े हिस्से में भी भारी कीचड़ और दलदल है। ऐसे में वहां चिता सजाना बेहद मुश्किल हो गया है।
शव लेकर घाट पहुंचना भी बना चुनौती
बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों की कई सड़कों पर पानी बह रहा है। ऐसे में शव यात्रा को नाव या पानी के बीच से निकालकर घाट तक पहुंचाना भी जोखिम भरा हो गया है। किसी तरह शव लेकर घाट पहुंचने वाले परिजनों को वहां अंतिम संस्कार के लिए सूखी जगह नहीं मिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में भोजन, आवास और आवागमन की समस्या तो बनी ही है, लेकिन किसी अपने की मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम विदाई देना भी मुश्किल हो जाना बेहद पीड़ादायक स्थिति है।
वैकल्पिक श्मशान घाट की व्यवस्था की मांग
स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन एवं गोपालपुर अंचल प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने तक किसी सुरक्षित, ऊंचे और पक्के स्थान पर अस्थायी वैकल्पिक श्मशान घाट बनाया जाए।
इसके साथ ही वहां टिन शेड, सूखी लकड़ी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था कराने की मांग की गई है, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवार अपने परिजनों का अंतिम संस्कार विधि-विधान और सम्मान के साथ कर सकें।
बाढ़ प्रभावित गोपालपुर में राहत और बचाव के बीच अब मृतकों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रशासन के सामने एक गंभीर मानवीय चुनौती बन गई है।
