भागलपुर। दत्तक ग्रहण की समस्त वैधानिक एवं निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग एक वर्ष आयु के एक बालक को रांची के दत्तक ग्राही दंपति महेश बरई एवं पूनम देवी को विधिवत सौंप दिया गया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी, भागलपुर एवं सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई सहित संबंधित अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
Total Downloads: 222
इससे पूर्व बालक के दत्तक ग्रहण से संबंधित वाद को जिला पदाधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया था। निर्धारित प्रक्रिया की समीक्षा के बाद जिला पदाधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण की अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद बालक को विधिवत उसके दत्तक माता-पिता को सौंपने की कार्रवाई पूरी की गई। दत्तक ग्राही पिता व्यवसाय करते हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए होता है दत्तक ग्रहण
जिला बाल संरक्षण इकाई की ओर से बताया गया कि दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और निर्धारित वैधानिक प्रावधानों के तहत संपन्न होती है। इच्छुक दंपति मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। पंजीकरण के लिए मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और ई-मेल आईडी की आवश्यकता होती है।

पंजीकरण के बाद निकटतम विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा दत्तक ग्राही माता-पिता की होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है। पोर्टल के माध्यम से दंपति अपनी पात्रता से संबंधित जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
सीधे बच्चा गोद लेना गैर-कानूनी
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिशन वात्सल्य पोर्टल और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अलावा किसी व्यक्ति, अस्पताल या नर्सिंग होम से सीधे बच्चा गोद लेना गैर-कानूनी है। दत्तक ग्रहण से संबंधित जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया के लिए विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया जा सकता है।
किसी परित्यक्त बच्चे के मिलने पर उसे 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रावधान है। इसके साथ ही बच्चे का निर्धारित समयावधि में मिशन वात्सल्य पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाता है। इसके बाद बच्चे के संबंध में विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है। कोई दावेदार सामने नहीं आने पर बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चे को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त करने की कार्रवाई की जाती है।
मैचिंग के बाद डीएम के समक्ष प्रस्तुत होता है वाद
इसके बाद बच्चे की इच्छुक दंपति के साथ ऑनलाइन मैचिंग, एडॉप्शन कमिटी की बैठक और विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की ओर से जिला पदाधिकारी के समक्ष दत्तक ग्रहण वाद प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। जिला पदाधिकारी के निर्णय के बाद ही बच्चे को दत्तक माता-पिता को सौंपने की कार्रवाई की जाती है।
दत्तक ग्रहण के बाद भी विभाग की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। बच्चे को दत्तक दिए जाने के बाद दो वर्षों तक निकटतम विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा फॉलो-अप किया जाता है, ताकि बच्चे के हित, सुरक्षा और समुचित देखभाल की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
बालक को दत्तक माता-पिता को सौंपे जाने के दौरान सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, समन्वयक, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के प्रतिनिधि समेत अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
बालक को अपने परिवार का हिस्सा बनाने के बाद दत्तक ग्राही दंपति के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने इस अवसर पर भावुकता और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बच्चे के साथ नया पारिवारिक जीवन शुरू करने पर खुशी जाहिर की।
