खाद की थोक बिक्री में टैगिंग का आरोप, खुदरा विक्रेताओं ने एसडीएओ को सौंपा ज्ञापन
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नवगछिया/शाहकुंड। अनुमंडल क्षेत्र में उर्वरक की थोक बिक्री में कथित टैगिंग और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने को लेकर खुदरा खाद विक्रेताओं में आक्रोश है। सोमवार को खुदरा विक्रेताओं ने एसडीएओ को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बिना किसी अनचाही टैगिंग के निर्धारित सरकारी दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की।
खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से यूरिया की कीमत 266 रुपये और डीएपी की कीमत 1350 रुपये प्रति बैग निर्धारित है। आरोप है कि थोक विक्रेताओं की ओर से बिना अतिरिक्त उत्पाद की टैगिंग के खाद उपलब्ध कराने से इनकार किया जाता है। इसके कारण खुदरा विक्रेताओं को खाद के साथ अन्य उत्पाद भी लेने पड़ते हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है।

विक्रेताओं के अनुसार, रबी और खरीफ सीजन के दौरान रेक प्वाइंट पर यूरिया 300 से 350 रुपये प्रति बैग तक टैगिंग के साथ दिए जाने का आरोप है। इसके अलावा रेक प्वाइंट से दुकान तक खाद पहुंचाने में करीब 25 से 30 रुपये प्रति बैग अतिरिक्त ढुलाई खर्च आता है। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि इन अतिरिक्त खर्चों के कारण किसानों को सरकारी निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि एचयूआरएल की गिरनार कंपनी के एसएसपी रेक में यूरिया के साथ एसएसपी लेने की शर्त रखी गई। वहीं, डीएपी रेक के साथ अमोनियम सल्फेट दिए जाने की बात कही गई है।
विक्रेताओं का यह भी आरोप है कि केवल डीएपी उपलब्ध कराने के एवज में 1700 से 1800 रुपये प्रति बैग तक की राशि वसूली जा रही है। इससे खुदरा विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और इसका असर आगे किसानों पर भी पड़ने की आशंका है।
खुदरा विक्रेताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, उर्वरक की थोक बिक्री में कथित टैगिंग पर रोक लगाने और निर्धारित सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
