नवगछिया। भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड के कोसी पार स्थित सुदूर भवनपुरा गांव में मां दुर्गा मां जलेश्वरी के रूप में पूजी जाती हैं। यहां माता की प्रतिमा के स्थान पर एक पत्थर की पूजा होती है। ग्रामीणों की मान्यता है कि यह पत्थर जीवंत है और समय के साथ इसका आकार लगातार बढ़ रहा है। करीब 200 वर्ष पुरानी लोककथा इस मंदिर की पहचान और आस्था का आधार है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
Total Downloads: 400
मछुआरे के जाल में बार-बार फंसता था पत्थर
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो सौ वर्ष पहले एक मछुआरा चनौका तालाब में मछली पकड़ने के लिए जाल डालता था। लेकिन उसके जाल में मछलियों के बजाय हर दिन एक पत्थर फंस जाता था। मछुआरा इसे अपनी बदकिस्मती समझकर पत्थर को वापस तालाब में फेंक देता था। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा।

सपने में मां दुर्गा ने बताया पत्थर का रहस्य
लोकमान्यता के अनुसार, एक रात मां दुर्गा ने मछुआरे को सपने में दर्शन दिए और बताया कि उसके जाल में बार-बार फंसने वाला पत्थर उन्हीं का प्रतीक है। अगली सुबह मछुआरे ने ग्रामीणों को पूरी बात बताई। शुरुआत में लोगों को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन वे उसके साथ तालाब पर पहुंचे।
बताया जाता है कि मछुआरे ने जब दोबारा जाल डाला, तो उसमें फिर वही पत्थर निकला। इसके बाद ग्रामीणों ने उसकी बात पर विश्वास करते हुए पत्थर को मां के प्रतीक के रूप में स्थापित किया और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। इसी धार्मिक मान्यता के साथ माता का नाम मां जलेश्वरी पड़ा।
जीवंत पत्थर और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा की मान्यता
ग्रामीणों का कहना है कि मां जलेश्वरी का प्रतीक पत्थर जीवंत है और उसका आकार लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां जलेश्वरी भवनपुरा पंचायत की प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करती हैं। यहां आने वाले भक्त श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
हालांकि, पत्थर के आकार में वृद्धि और माता की चमत्कारी महिमा से जुड़ी बातें स्थानीय आस्था एवं लोकमान्यता पर आधारित हैं।
नवरात्र में होते हैं विशेष धार्मिक आयोजन
शारदीय नवरात्र की पहली पूजा से ही मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान और विभिन्न आयोजन शुरू हो जाते हैं। इन आयोजनों में भवनपुरा पंचायत के ग्रामीण बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। भवनपुरा पंचायत के विनीत कुमार सिंह उर्फ बंटी सिंह के नेतृत्व में पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं, सौरभ सिंह राजपूत सहित अन्य ग्रामीण भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
कोसी पार के इस गांव में मां जलेश्वरी का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। करीब दो सौ वर्षों से चली आ रही इस लोककथा के कारण मंदिर की अपनी विशिष्ट पहचान बनी हुई है।
