नवगछिया। आस्था, तंत्र साधना और सदियों पुरानी लोक परंपराओं का अनूठा संगम एक बार फिर नवगछिया के खगड़ा गांव में देखने को मिलेगा। यहां प्रसिद्ध मां बम काली मंदिर में करीब 314 वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 8 नवंबर की मध्यरात्रि को तांत्रिक विधि-विधान के साथ मां बम काली की आठ फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर गांव में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
खगड़ा गांव स्थित मां बम काली मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं और विशेष पूजा पद्धति के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां करीब सवा तीन शताब्दी से मां काली की आराधना तांत्रिक विधि से की जा रही है। मंदिर की स्थापना से जुड़ी मान्यताएं आज भी ग्रामीणों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।
सपने में मिली थी मां की स्थापना की प्रेरणा

स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, मां बम काली मंदिर की स्थापना गांव के पूर्वज बाबू धौताल सिंह के परिवार से जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि उनके तीसरे वंशज बाबू प्रभु नारायण सिंह को एक रात स्वप्न में मां बम काली की स्थापना करने की प्रेरणा मिली थी।
इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर की स्थापना की और तांत्रिक पद्धति से पूजा-अर्चना की शुरुआत की। तभी से उनके वंशज इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और परिसर को आधुनिक स्वरूप दिया गया, लेकिन पूजा के पारंपरिक विधान आज भी कायम हैं।
आठ फीट की प्रतिमा और दुलुप के फूल का विशेष महत्व
खगड़ा की बम काली पूजा की सबसे बड़ी विशेषता मां की लगभग आठ फीट ऊंची प्रतिमा है। कार्तिक अमावस्या की मध्यरात्रि में नयन पूजन और निशा पूजन विशेष तांत्रिक विधि-विधान से संपन्न कराया जाता है। पूजा में दुलुप के विशेष पुष्पों का अर्पण अनिवार्य माना जाता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार छाग बलि भी अर्पित करते हैं। पूजा में गांव के सभी परिवारों की सहभागिता रहती है। सामूहिक सहयोग और भागीदारी इस आयोजन को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का प्रतीक भी बनाती है।
जागृत स्वरूप में विराजमान हैं मां बम काली
पूजा समिति के कार्यकारिणी सदस्य धीरज सिंह ने बताया कि श्रद्धालु मां बम काली को जागृत स्वरूप में विराजमान मानते हैं। भक्तों के बीच यह विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता के दरबार में चढ़ावा अर्पित करते हैं।
उन्होंने बताया कि जो भक्त किसी कारणवश मंदिर नहीं पहुंच पाते, वे डिजिटल माध्यमों से अपनी भेंट भेजते हैं और ऑनलाइन दर्शन करते हैं। मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं।
8 नवंबर को निशा पूजन, 9 नवंबर को गंगा में होगा विसर्जन
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रंजीत शास्त्री ने बताया कि 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या की मध्यरात्रि में तांत्रिक विधि-विधान के साथ मां की प्रतिमा स्थापित कर निशा पूजन किया जाएगा। इसके अगले दिन 9 नवंबर को परेवा तिथि में महाआरती का आयोजन होगा।
महाआरती के बाद मां की प्रतिमा को कंधों पर उठाकर गंगा नदी में विसर्जन के लिए ले जाया जाएगा। गांव के बुजुर्ग, युवा और श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते हुए इस परंपरा में शामिल होंगे। प्रतिमा को कंधों पर उठाकर गंगा तक ले जाने की परंपरा इस आयोजन का विशेष आकर्षण है।
भव्य सजावट और सुरक्षा की तैयारियां तेज
बम काली पूजा समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रोशनी, आकर्षक सजावट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
समिति के स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने की तैयारी है। बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। 314 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को लेकर पूरे खगड़ा गांव में उत्साह का माहौल है।
