नवगछिया : आशीष कुमार, प्राइवेट स्कूलोें के बारे में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भारत सरकार ने लगाम लगाने का फैसला किया है. 2017-18 सेशन से देश के सभी सीबीएसई स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों को ही पाठ्यक्रम में चलाना होगा.
सरकार के इस फैसले से लाखों अभिभावकों को राहत मिलेगी क्योंकि सीबीएसई स्कूल उनलोगों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर करती हैं. निजी प्रकाशकों की किताबों का दाम एनसीईआरटी के मुकाबले 300-600 फीसदी ज्यादा होता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक यह फैसला केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा मीटिंग में लिया गया है.

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ एचआरडी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि एनसीईआरटी को पर्याप्त संख्या में मार्च के अंत तक देश भर में पुस्तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है ताकि शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए अप्रैल तक की सीमा पूरी हो सके. सभी सीबीएसई स्कूलों को 22 फरवरी, 2017 तक सीबीएसई की वेबसाइट पर मांग ऑनलाइन जमा करनी होगी.

अखबार में छपी रिपोर्ट में वरिष्ठ एचआरडी के एक अधिकारी ने बताया, ‘ये स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बेचने के अलावा पेंसिल, इरेजर्स और स्टेशनरी भी मनमाने दामों पर बेचते हैं. ये चीजें अगर पैरंट्स बाहर मार्केट से खरीदें तो उनको बहुत कम खर्च पड़ेगा. हमने यह भी देखा है कि कई निजी प्रकाशक प्राइवेट स्कूलों के हेड का स्विट्जरलैंड जैसे देशों का खर्च भी उठा रहे हैं

