नवगछिया : अजीत पाण्डेय, दीपावली के एक दिन पहले यानी इस बार 18 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी पड़ रही है. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या फिर रूप चतुर्दशी कहते हैं.

 इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके लिए व्रत करने का विधान है. माना जाता है कि महाबली हनुमान जी का जन्म इसी दिन हुआ था. इसीलिए आज बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है.

क्या है मान्यता?

ऐसा बताया जाता है कि इस दिन अालस्य और बुराई को हटाकर जिंदगी में सच्चाई की रोशनी का आगमन होता है. रात को घर के बाहर दिए जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु की संभावना टल जाती है. एक कथा के मुताबिक इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था.

इस मंत्र का करें जाप

सितालोष्ठसमायुक्तं संकण्टकदलान्वितम्। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:।।

पूजा करने की विधि

– नरक चतुर्दशी के दिन शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें.

– सूर्योदय से पहले स्नान करें.

– स्नान के दौरान अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) को शरीर पर स्पर्श करें.

– अपामार्ग को निम्न मंत्र पढ़कर मस्तक पर घुमाए.

– नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें.

– तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाए.

– निम्न मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देनी चाहिए

ऊं यमाय नम:, ऊं धर्मराजाय नम:, ऊं मृत्यवे नम:, ऊं अन्तकाय नम:, ऊं वैवस्वताय नम:, ऊं कालाय नम:, ऊं सर्वभूतक्षयाय नम:, ऊं औदुम्बराय नम:, ऊं दध्राय नम:, ऊं नीलाय नम:, ऊं परमेष्ठिने नम:, ऊं वृकोदराय नम:, ऊं चित्राय नम:, ऊं चित्रगुप्ताय नम:

इस दिन दीये जलाकर घर के बाहर रखते हैं. ऐसी मान्यता है की दीप की रोशनी से प‌ितरों को अपने लोक जाने का रास्ता द‌िखता है. इससे प‌ितर प्रसन्न होते हैं और प‌ितरों की प्रसन्नता से देवता और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं. दीप दान से संतान सुख में आने वाली बाधा दूर होती है. इससे वंश की वृद्ध‌ि होती है.

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By न्यूज़ डेस्क

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