पटना : खबर बिहार के पोलिटिकल बैठकखानों से निकल रही है. चुनाव लड़ने वाले नेता 2019 के लोक सभा चुनाव की तैयारी भीतर-भीतर करने लगे हैं. क्षेत्र और संभावनाओं की लाइन-डोरी को ठीक कर रहे हैं. 2014 में भी अश्विनी कुमार चौबे भागलपुर से ही लोक सभा चुनाव लड़ना चाहते थे. पर शहनवाज हुसैन को टिकट मिलने के कारण चौबे को बेमन से बक्सर आना पड़ा था. लेकिन खुशकिस्मत चौबे निकले, जो बक्सर में जीत गये और बदकिस्मती शहनवाज के खाते आई, जो भागलपुर में चुनाव हार गये. अभी अश्विनी कुमार चौबे केन्द्र में राज्य मंत्री बन गये हैं. पिछले दिनों बक्सर में हुई एक दुर्घटना में उनके पैर की हड्डी टूट गई है. डाक्टरों ने प्लास्टर के बाद बेड रेस्ट को कहा है. पोलिटिकल बैठकखाने के लोग कहते हैं कि अश्विनी कुमार चौबे का प्रेम अब भी भागलपुर के लिए अधिक उमड़ता है. जिंदगी की पूरी राजनीति अश्विनी चौबे ने भागलपुर में ही की है. ऐसे में, वे फिर से 2019 में भागलपुर का चुनाव लड़ना अधिक पसंद करेंगे. अपने मन की बात उन्होंने केन्द्रीय नेताओं को बता रखी है. बक्सर में एक दुर्घटना में फ्रैक्चर हुआ है अश्विनी चौबे का पैर.
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भागलपुर है भाजपा के लिए चुनौती
2014 के चुनाव में भागलपुर में हार से भाजपा को बड़ा झटका लगा था. पूरे देश में मोदी का महालहर चल रहा था, लेकिन भागलपुर में यह पंक्चर हो गया था. भाजपा की विवेचना में स्पष्ट हुआ था कि भागलपुर में हिन्दू वोट एकमत नहीं हो पाया था. इसका कारण शहनवाज हुसैन की उम्मीदवारी भी थी. शहनवाज राजद के प्रत्याशी बुलो मंडल के हाथों हारे थे. ऐसे में, 2019 में भागलपुर फिर से भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी. वजह कि भाजपा को भी पता है कि 2014 की तरह मोदी महालहर का सीन 2019 के लिए अभी से बनता तो नहीं दिख रहा है. इस कारण अश्विनी चौबे आसानी में बक्सर से भागलपुर शिफ्ट हो जा सकते हैं. भाजपा नेता शहनवाज राजद के प्रत्याशी बुलो मंडल के हाथों लोकसभा चुनाव हारे थे. मंगल पांडेय की नजर में है बक्सर
बक्सर संसदीय क्षेत्र भाजपा के चश्मे में सदैव ब्राह्मण उम्मीदवारों की सीट रही है. पहले लालमुनि चौबे सांसद हुआ करते थे. लेकिन बाद में भाजपा ने चौबे को टिकट से वंचित कर दिया था. सिने स्टार मनोज तिवारी भी पहले बक्सर से ही लड़ना चाहते थे, पर आखिर में भाजपा उन्हें दिल्ली ले गई. दिल्ली में मनोज तिवारी की प्रगति भी तेज हुई है. अब मनोज तिवारी दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं. अंत समय में 2014 में भाजपा ने बक्सर का टिकट अश्विनी चौबे के लिए फाइनल किया और वे जीत भी गये. पोलिटिकल बैठकखाना के जानकार बताते हैं कि अश्विनी चौबे के भागलपुर शिफ्ट होने की स्थिति में मंगल पाण्डेय बक्सर से चुनाव लड़ सकते हैं. मंगल पांडेय का वजन अभी भाजपा में बढ़ा हुआ है. सूबे के हेल्थ मिनिस्टर तो हैं हीं, साथ में भाजपा ने उन्हें हिमाचल प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया था. माना जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत होने जा रही है. मंगल पाण्डेय और नंदकिशोर यादव ने यूपी के चुनाव में भी भाजपा के लिए बड़ी भूमिका का निर्वहन किया था.
अभी बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं मंगल पांडेय.

मंगल पांडेय अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं. वे मूल रुप से सीवान के रहने वाले हैं. पर जानकार कह रहे हैं कि अश्विनी चौबे की रजामंदी से मंगल पांडेय ने बक्सर में अपने लिए जमीन तलाशनी अभी से शुरु कर दी है.
शहनवाज हुसैन का क्या होगा ?
सवाल पूछा जाने लगा है कि अश्विनी कुमार चौबे भागलपुर चले गये तो शहनवाज हुसैन का क्या होगा. वे सचमुच बेटिकट हो जायेंगे क्या. अभी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में शहनवाज की लॉबी ठीक से काम नहीं कर रही है. वैसे शहनवाज हुसैन तो 2019 के पहले ही अररिया से भी लोक सभा का उपचुनाव लड़ने को तैयार हैं. अररिया में उपचुनाव राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के आकस्मिक निधन के कारण होना है. पर, यह टिकट पाना भी शहनवाज के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि अररिया का समीकरण कुछ दूसरा है. फिर यह उपचुनाव बिहार में सीधे तौर पर राजद बनाम एनडीए गठबंधन में कौन कितना भारी, तय करेगा. सो,शहनवाज के साथ भाजपा बहुत अधिक रिस्क अभी नहीं ले सकती है.
