गोपालपुर : झंडापुर के महादलित परिवार के ट्रिपल हत्याकांड नवगछिया पुलिस के लिये गले की हड्डी बन गई है. घटना के लगभग आठ दिनों के बाद भी पुलिस इस तिहरे मर्डर की गुत्थी को नहीं सुलझा सकी है. आखिर झंडापुर के महादलित परिवार के तीन लोगों की हत्या व बिंदी कुमारी को गंभीर रूप से घायल किसने किया. इतनी बडी घटना को अंजाम देने का पीछे हत्यारों का क्या उद्देश्य है ? इस मर्मस्पर्शी घटना के बाद झंडापुर के महादलित परिवार काफी डरे व सहमे हुए हैं. पीएमसीएच में गंभीर रूप से घायल बिंदी कुमारी जीवन और मौत से जूझ रही है. नवगछिया पुलिस ने मृतक कनीक राम के साझीदार मोहन सिंह को पहले पूछताछ हेतु हिरासत में लिया.
बाद में दामाद दिनेश राम के 164 के बयान को आधार बनाकर मोहन सिंह को अप्राथमिक अभियुक्त बनाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. मोहन सिंह की गिरफ्तारी झंडापुर के लोगों को नहीं पच रही है.ग्रामीण कहते हैं कि यदि व्यापारिक साझेदारी के विवाद में मोहन सिंह को कनीक राम की हत्या करनी होती तो वह जलकर में ही उसकी हत्या कर शव को ठिकाने लगा सकता था. देर रात को घर में घुसकर एक साथ चार लोगों की हत्या अकेले करना संभव नहीं है. कनीक के घर से पुलिस द्वारा मोबाइल बरामद किया गया है.

अभी तक पुलिस यह नहीं बता पा रही है कि उक्त मोबाइल किसका है. उस मोबाइल से बिंदी किससे बात करती थी और कौन उस पर फोन कर किससे बात करता था .ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस इस दिशा में जाँच करने के नाम पर घटना को दूसरी तरफ मोड रही है. हालाँकि इस मामले की निगरानी डीआईजी विकास वैभव स्वयं कर रहे हैं. जिससे लोगों को उम्मीद है कि इस हत्याकांड की गुत्थी भी जल्द ही सुलझेगी. झंडापुर ओपी से महज सौ कदम की दूरी पर इतनी बडी घटना हुई .
लेकिन पुलिस को कुछ भी पता नहीं चल पाया .झंडापुर के ग्रामीण भी स्थानीय पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं .लोगों में असुरक्षा की भावना बढती जा रही है. हालाँकि एक ही महादलित परिवार के तीन लोगों की हत्या होने के कारण यह मामला काफी चर्चित हो गया है .बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी व सांसद पप्पू यादव के झंडापुर आने व भाजपा के पूर्व विधायक ई कुमार शैलेन्द्र के आमरण अनशन किये जाने के कारण यह राजनीतिक मुद्दा बन गया है.


