बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने एक अप्रैल से पांच फीसदी महंगी बिजली दर का फैसला सुनाया है। केवल एक श्रेणी बड़े उद्योग में यह वृद्धि दर 9.92 फीसदी है। बिजली कंपनी ने 44 फीसदी बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। आयोग के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने बिजली दर की समीक्षा कर अनुदान देने की बात कही है।
कंपनी को आयोग ने दिया टास्क
1. गैर घरेलू सेवा (एनडीएस-एक) और राजकीय सिंचाई नलकूप (आईएएस-दो) में बिना मीटर वाले उपभोक्ता श्रेणी को समाप्त कर दिया गया है। एक अप्रैल से इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को मीटर से ही बिजली बिल दिया जाए।
2. एक अप्रैल 2019 से बिना मीटर वाले सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं की श्रेणी समाप्त कर दी जाएगी। इसके लिए कंपनी आवश्यक कार्रवाई करे।
3. वर्ष 2018-19 में साउथ बिहार 20 फीसदी व नॉर्थ बिहार कंपनी 22 फीसदी तक तकनीकी-व्यवसायिक नुकसान लाए। अभी कंपनी का नुकसान 36 फीसदी है। अगले वित्तीय वर्ष में नुकसान को 15 फीसदी पर लाया जाए।
4. कुल खपत में सौर ऊर्जा 3.25 फीसदी और गैर सोलर बिजली छह फीसदी का उपयोग करना होगा।

उपभोक्ताओं को छूट
फिक्स चार्ज में वृद्धि नहीं, समय पर बिल देने पर डेढ़ फीसदी की छूट
ऑनलाइन भुगतान करने पर एक फीसदी की अतिरिक्त छूट
समय पर ऑनलाइन भुगतान करने पर कुल ढाई फीसदी की छूट
बिजली कंपनी के प्रस्ताव पर फैसला सुनाने का अधिकार विनियामक आयोग को है। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने दर की समीक्षा के बाद अनुदान देने की घोषणा की थी। उसी के तर्ज पर इस बार भी बिजली दर की समीक्षा करते हुए अनुदान पर निर्णय लिया जाएगा।
– प्रत्यय अमृत, प्रधान सचिव, ऊर्जा विभाग
एक नजर में टैरिफ
शहरी क्षेत्र
यूनिट अभी है आयोग का फैसला
1-100 4.27 रुपए ¯6.15 रुपए
101-200 5.02 6.95
201-300 5.77 7.80
300 से अधिक 6.52 8.60
ग्रामीण क्षेत्र
0-50 2.65 6.15
51-100 2.90 6.40
100 से ऊपर 3.15 6.70
(बिजली दर रुपए प्रति यूनिट)


