टीएमबीयू में चल रहे 20 तरह के वोकेशनल कोर्स में करीब आधे पर ग्रहण लग गया है। विश्वविद्यालय और सरकार ने इस पर कोई प्रयास नहीं किया तो इनकी मान्यता खत्म हो जाएगी। साथ ही इसके आगे के जो कोर्स चल रहे हैं, उनकी भी हालत खराब हो जाएगी।

पीजी विभागों में 20 तरह के कोर्स चल रहे हैं, लेकिन इसमें 10 तरह के कोर्स या तो बंद हो गए हैं या फिर बंद होने की कगार पर हैं। इन सभी कोर्स को राजभवन ने मान्यता दे दी थी। इसमें से कई वोकेशनल कोर्स तो डॉ. रामश्रय यादव के समय भी शुरू किया गया था, जिसे बाद में राजभवन ने मान्यता दे दी है। जिन 10 कोर्स पर ग्रहण लग गया है, उसे राजभवन ने 2006 या 2007 में मान्यता दे दी थी।

वोकेशनल कोर्स की दयनीय हालत को लेकर राजभवन तक चिंतित है। इसीलिए 18 मई को पटना में राज्य के सभी कुलपतियों, प्रतिकुलपतियों और रजिस्ट्रार की बैठक बुलाई गई थी। इसमें वोकेशनल कोर्स की हालत को कैसे दुरुस्त किया जाए, इस पर चर्चा हुई।

ये कोर्स नहीं चल रहे

विवि ने एक सूची तैयार की है, जिसमें मास्टर ऑफ केमिकल एनालिसिस एंड इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट, डिप्लोमा कोर्स इन पोपुलेशन एंड ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट, बीएससी ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स केमिस्ट्री, पीजी डिप्लोमा इन म्यूजियोलॉजी एंड टूरिज्म, एडवांस डिपलोमा इन पारा मेडिकल, डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लिकेशन एंड लाइब्रेरी ऑटोमेशन। लेकिन पीजी डिप्लोमा इन हिन्दी जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में भी छात्र नहीं आ रहे हैं। एलएलबी तीन वर्षीय कोर्स और एलएलबी पांच वर्षीय कोर्स पर भी बीसीआई से मान्यता नहीं मिलने के कारण ग्रहण लग गया है।

बंद होने के हैं कई कारण

वोकेशनल कोर्स के निदेशक डॉ. पवन पोद्दार ने बताया कि विभाग में शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। आजतक ठीक ढंग से और गंभीरता से पढ़ाई भी नहीं हुई। इस कारण छात्रों को ठीक जानकारी नहीं मिल पाई। न कैंपस सेलेक्शन हुआ और नौकरियां भी अच्छी नहीं मिली। इसकी परीक्षाएं भी काफी देर से होती रहीं। इस कारण छात्रों को लगा कि इन कोर्स में टीएमबीयू में नामांकन लेने से अच्छा है, कहीं और लिया जाए।

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By न्यूज़ डेस्क

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