टीईटी और एसटीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में सफल 20 हजार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र की मान्यता समाप्त हो गई है। यह प्रमाणपत्र 7 साल के लिए मान्य होता है। अब इन अभ्यर्थियों को शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए फिर से टीईटी या एसटीईटी पास करना पड़ेगा। दिसंबर 2011 में इन्हें प्रमाणपत्र मिला था। अब ये अभ्यर्थी शिक्षक की नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। .

परीक्षा में 2 लाख 50 हजार अभ्यर्थी पास हुए थे। अब तक पांच बार नियोजन प्रक्रिया हो चुकी है पर 20 हजार अभ्यर्थियों का नियोजन नहीं हो पाया है। इनमें पांच हजार अनट्रेंड अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने टीईटी करने के बाद प्रशिक्षण भी ले लिया है। छठी बार शिक्षकों के नियोजन के लिए 2017 में प्रक्रिया शुरू हुई पर बाद में नियोजन प्रक्रिया रद्द कर दी गई। टीईटी और एसटीईटी हर साल होना है। सीबीएसई सीटीईटी की परीक्षा हर साल लेता है लेकिन बिहार में 2011 में ही एसटीईटी का आयोजन हुआ था। 2011 के बाद 2017 में टीईटी हुआ लेकिन एसटीईटी का आयोजन अब तक नहीं हो पाया है।.

टीईटी-एसटीईटी के अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा – 20 हजार अभ्यर्थी अब सड़क पर आ गए हैं। इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र की मान्यता समाप्त हो गई है। अब इन अभ्यर्थियों का नियोजन नहीं हो पाएगा। अतिथि शिक्षक के बदले इन अभ्यर्थियों को मौका देना चाहिए था।

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By न्यूज़ डेस्क

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