क्या हो गया है अपने भागलपुर को. रात के अंधेरे में नवगछिया कोर्ट में दस्तावेज जला दिये जाते हैं. गांव में घर की छत पर सोये युवक की हत्या कर दी जाती है. साढ़े चार लाख के लिए परिजन अपनी विधवा पोतहू की हत्या कर देते हैं.
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कही सड़कें तालाब बनी हैं तो कही कूड़ा ने रौरव नर्क बना दिया है. क्या कहीं कुछ अच्छा नहीं हो रहा है. अगर हो रहा है तो वे नेपथ्य में क्यों हैं. रंगमंच पर मुख्य किरदार में बहरुपिये और खतरनाक जोकर ही नजर क्यों आ रहे हैं. कुछ सुखद अच्छी, पॉजिटिव चीजें भागलपुर को ताजी सांसें दे सकती हैं.


अपने समाज, अपने आसपास, घर, दफ्तर क्यों न कुछ अच्छी चीजों को खोजा जाये. मुट्ठी भर ही सही ऐसे लोग अभी भी तो बचे हैं. विज्ञापन व स्वार्थ से दूर. स्वानत: सुखाय के साथ अपने लक्ष्य को समर्पित. कोशिश होगी कुछ ऐसी घटनाओं व लोगों से आपका परिचय करवाने की.
नोट : लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और प्रभात खबर भागलपुर में कार्यरत है। यह आलेख उनके फेसबुक वाल से लिया गया है।
