संविदा पर नियोजित कर्मियों के सेवा-नियमितीकरण को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब 39 महीने का वक्त लिया. इस दौरान समिति ने सरकार के 45 विभिन्न विभाग, निदेशालय व क्षेत्रीय कार्यालयों से उनके अंदर काम करने वाले संविदाकर्मियों की विस्तृत रिपोर्ट ली. इस रिपोर्ट में नियोजन के तमाम प्रावधानों का अध्ययन करने के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय सहित 14 विभिन्न न्यायालयों से संविदाकर्मियों को लेकर दिये गये निर्णय का हवाला दिया है.

पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री को कुल 314 पन्नों की फाइनल रिपोर्ट सौंपी है. इस रिपोर्ट में विभाग, निदेशालय व क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मियों को लेकर अलग-अलग अनुशंसा की गयी है. उच्चस्तरीय समिति ने कर्मचारी संगठनों से मिले आवेदनों पर भी गौर किया.

मामला संविदाकर्मियों के िनयमितीकरण का

—हर विभाग के अंदर काम करने वाले संविदाकर्मियों के लिए अलग-अलग की गयी है अनुशंसा
—विभिन्न न्यायालयों के 14 आदेशों के साथ ही संवैधानिक प्रावधानों का भी किया गया है उल्लेख
अब संशोधित संकल्प निर्गत करेगी कैबिनेट

सूबे में संविदा पर नियुक्ति को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने जुलाई 2007 में संकल्प जारी किया था. उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसाओं को लागू करने के लिए उक्त निर्देश में उच्चस्तरीय समिति द्वारा अनुमोदित अनुशंसाओं का समावेश कर कैबिनेट से संशोधित संकल्प निर्गत किया जायेगा.

इसके बाद सभी विभाग कार्यपालिका नियमावली में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आदेश निर्गत करेंगे. प्रत्येक विभाग से नामित नोडल पदाधिकारी समय-सीमा के भीतर समिति की अनुशंसाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे.

न्यायालय के फैसलों की विस्तार से चर्चा

संविदा कर्मियों को लेकर विभिन्न न्यायालयों के दिये गये फैसलों की विस्तार से चर्चा की गयी है. कर्नाटक राज्य के सचिव बनाम उमा देवी व अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि उन्हीं कर्मियों की सेवा नियमित की जा सकती है, जिनके पद स्वीकृत हों, नियुक्त कर्मी पद की अर्हता रखता है, पद विज्ञापित किया गया हो, नियुक्ति हेतु स्क्रीनिंग समिति का गठन या चयन प्रक्रिया अपनायी गयी हो, नियुक्ति सक्षम प्राधिकार द्वारा की गयी हो एवं 10 अप्रैल 2006 को ऐसे कर्मी 10 साल की सेवा बिना किसी न्यायालय अथवा न्यायाधिकरण के हस्तक्षेप के पूर्ण कर चुके हों. इसी तरह, 13 अन्य न्यायालय निर्णय का भी उल्लेख समिति की रिपोर्ट में किया गया

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By Rishav Mishra Krishna

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