मुहर्रम की शुरुआत होने में 14 दिन बचे हैं। अगर जिलहिज्जा महीने के 29 का चांद होगा तो मुहर्रम की दसवीं तारीख यानी यौमे अशुरा 20 सितम्बर को होगा। लेकिन अगर जिलहिज्जा का चांद 30 का होता है तो उस एतबार से मुहर्रम की दसवीं तारीख 21 सितम्बर बरोज जुमा के दिन पड़ेगा। मुहर्रम को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच तैयारी शुरू हो गई।
मुहर्रम पर जुलूस निकालने के लिए विचार-विमर्श चल रहा है। खानकाह शहबाजिया के हेड मुदर्रिस मुफ्ती मौलाना फारूक आलम अशरफी ने कहा कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। इस महीने की बहुत सारी यादगार है। यह तारीखी महीना है। उन्होंने कहा कि आदम अलैह सलाम की तौबा इसी महीने में कबूल हुई। हजरत नूह अलैह सलाम की कश्ती इसी महीने में किनारे लगी। दाउद अलैह सलाम को इसी महीने में बदशाहत अता की गई और इसी महीने में हजरत मोहम्मद सल्लाहो अलैह के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ अपनी शहादत देकर इस्लाम के बागीचे को हराभरा फरमाया।

मौलाना फारूक ने कहा कि मुहर्रम के दसवीं तारीख को आज से 1400 साल पहले यजीद नाम का खलीफा शरीअत के खिलाफ काम करना शुरू कर दिया और साथ ही साथ लोगों पर जुल्म शुरू कर दिया। इमाम हुसैन ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को बता दिया कि यह यजीद किसी तरह भी खलीफा होने के लायक नहीं है। इस बात के लिए उसने कर्बला के मैदान में 22 हजार का लश्कर भेजकर इमाम हुसैन और उनके घर वालों सहित उनके मानने वाले को शहीद करवा दिया। आज इमाम हुसैन के मानने वाले यजीद के खिलाफ उस जुल्म व सितम पर आक्रोश जाहिर करते हैं।


