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नवगछिया: चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी अपनी धूरी पर भ्रमण करते हुए चंद्रमा व सूर्य के बीच आ जाती है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा का पूरा या आधा भाग ढ़क जाता है। इसी को चंद्र ग्रहण कहते हैं। भारतीय राजधानी नई दिल्ली के रेखांश-अक्षांश अनुसार भाद्रपद, पूर्णिमा, शनिवार दिनांक 17.09.16 को मीन राशि और पूर्वाभद्रपद नक्षत्र में चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण की उपच्छाया से पहला स्पर्श शुक्रवार दिनांक 16.09.16 को रात्री 10 बजकर 27 मिनट और 22 सेकंड पर होगा। चंद्रग्रहण का परमग्रास शनिवार दिनांक 17.09.16 रात 12 बजकर 25 मिनट व 48 सेकंड पर होगा। चंद्रग्रहण का उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श रात 02 बजकर 24 मिनट व 15 सेकंड पर होगा। इसकी अवधि 03 घण्टे 56 मिनट 52 सैकण्ड रहेगी। इस ग्रहण की उपच्छाया आंखों से नहीं दिखाई देगी। अतः भारत में चंद्रग्रहण की छाया व प्रच्छाया मान्य नहीं है अर्थात इसका कोई धार्मिक अस्तित्व नहीं पड़ेगा। यह चंद्रग्रहण आंशिक रूप से यूरोप, दक्ष‍िण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में दिखाई देगा।

सनातन धर्म में चंद्रग्रहण को अशुभ माना जाता है। सनातन धर्म की मान्यतानुसार चंद्र ग्रहण के समय खान-पान वर्जित माना जाता है। मत्स्य पुराण, भविष्य पुराण व नारद पुराण में चंद्रग्रहण के समय वर्जित बातों का उल्लेख है। मत्स्य पुराण के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र सिद्धि व आराधना का विशिष्ट स्थान है। मान्यतानुसार गर्भवती महिला को ग्रहण के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस काल में राहु व केतु का दुष्प्रभाव बढ्ने से गर्भ में पल रहे बच्चें को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं व गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

मान्यतानुसार इस काल में तेल लगाना, खानपान, बालों में कंघी, ब्रश आदि कार्य वर्जित हैं। चंद्रग्रहण कुंवारों के लिए अशुभ माना जाता है क्योंकि चंद्रमा का संबंध शीतलता व सुंदरता से होता है ग्रहण काल में चंद्रमा उग्र हो जाता है जिसका बुरा असर कुवांरे लड़के-लड़कियों पर पड़ता है अतः श्रापित होने पर जो भी कुंवारा लड़का या लड़की उसे देखता है तो उसकी शादी या तो रूक जाती है या बहुत मुश्किलों से तय होती है।

By Rishav Mishra Krishna

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