भागलपुर: अब थाने में तैनात किए गए थानाध्यक्ष को उनके थानों में कम से कम दो साल तक कार्यकाल बिताना होगा। सूबे के पुलिस महानिदेशक केएस द्विवेदी ने कार्यशैली पारदर्शी बनाने की दिशा में गुरुवार को इस संबंध में ताजा आदेश जारी किया है। जारी आदेश में डीजीपी ने कहा है कि एसएसपी/ एसपी यदि थानों में पदस्थापित थानाध्यक्ष को दो वर्ष की निर्धारित अवधि के पूर्व यदि लोकहित और कार्यहित में हटाना नितांत आवश्यक समझते हों तो ऐसा करने के पूर्व उन्हें डीआइजी की पूर्वानुमति जरूर लेनी होगी।


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किसी परिस्थिति में यदि जिले में डीआइजी का पद रिक्त हो। कोई अन्य जिलों के पदाधिकारी अतिरिक्त प्रभार में नहीं हो तो ऐसी स्थिति में आइजी से पूर्वानुमति लेनी होगी। निर्धारित अवधि से पूर्व थानाध्यक्ष के पद से हटाए गए पदाधिकारी को हटाए जाने की तिथि से अगले छह माह तक अन्यत्र थानाध्यक्ष के रूप में सामान्यतया पदस्थापित नहीं करेंगे। परंतु यदि थानाध्यक्ष के रूप में ऐसे पदाधिकारी का पदस्थापन आवश्यक प्रतीत हो तो संबंधित डीआइजी से पूर्वानुमोदन लेना होगा।

डीजीपी श्री द्विवेदी ने जारी आदेश में जोनल आइजी और रेंज डीआइजी को भी इस बात के लिए जवाबदेह बना दिया है कि यदि ऐसी परिस्थिति में एसएसपी/एसपी उनसे पूर्वानुमति और पूर्वानुमोदन मांगे तो उन्हें तीन दिनों के अंदर प्रदान करेंगे। डीजीपी ने अपने आदेश में कहा है कि क्षेत्रीय पदाधिकारियों के पदस्थापन में अधिकारी की निष्ठा और कार्यक्षमता का भी ध्यान रखते हुए सामाजिक संतुलन बनाए रखा जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई पदाधिकारी समान या भिन्न पंक्तियों में एक ही स्थान पर दोबारा पदस्थापित न हों। डीजीपी ने अपने आदेश में बिहार पुलिस एक्ट 2007 की कंडिका 10(2) में वर्णित प्रावधान का हवाला देते हुए कहा है कि इस संबंध में पूर्व के सभी आदेश को इस हद तक संशोधित समझा जाए।

By न्यूज़ डेस्क

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