धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस बार धनतेरस 5 नवंबर को है। मान्यता है कि इस दिन चांदी के बर्तन की खरीदारी करने से अधिक लाभ मिलता है। प्रदोष काल में गोशाला, कुआं, मंदिर आदि जगहों पर दीप जलाने से घर में शांति आती है।

ज्योतिषाचार्य दयान्द पाण्डेय ने बताया कि इस बार धनतेरस पर खरीदारी का सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 6:11 से 8: 07 बजे तक है। दिन में स्थिर कुंभ लग्न दिन के 1:34 बजे से 3:05 बजे तक। सर्वोत्तम स्थिर गौधूलि वृष लग्न 6:11 से 8:07 बजे तक, महानिशा सिंह लग्न रात्रि 12:38 से 2:54 मिनट तक है। हस्त नक्षत्र रात 9:02 तक है। धनतेरस पर नये बर्तन, सोने-चांदी, के जेवर, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा आदि खरीदने का विशेष महत्व है। वैद्य हकीम इस दिन धन्वन्तरि भगवान का पूजन कर उनकी जयंती मनाते हैं।

महिलाएं अकाल मौत से बचने के लिए वैदिक देवता यमराज की पूजा करतीं हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वन्तरि वैद्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धन्वन्तरि जयंती को धनतेरस कहते हैं। रात में यमराज के निमित्त दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर जलाया जाता है। इस दीप को यमदीप कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित अजीत पाण्डेय ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि जिन परिवारों में धनतेरस के दिन यम दीप जलाया जाता है, वहां अकाल मौत नहीं होती है। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को रात 10:06 बजे काशी पंचांग के अनुसार व मिथिला पंचांग के अनुसार 10:16 अमावस्या का प्रवेश हो रहा है। 7 नवंबर को काशी पंचांग के अनुसार 9:19 बजे व मिथिला पंचांग के अनुसार 9:30 तक काली पूजा का मुहूर्त है। गोवर्धन पूजा 8 व भैया दूज 9 नवंबर को है।

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By न्यूज़ डेस्क

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