राजाराम साह, नवगछिया
राजाराम साह, नवगछिया

राजाराम साह, नवगछिया : सरकार आती जाती है पर देश तो अपना हैं। माननीय मनमोहन जी को कहने को मौनी कह दिया गया। पाकिस्तान मिट्टी में पैदाईश होते हुए भी कभी अपने प्रधानमंत्री काल में पाकिस्तान जाना उचित नही समझा। एक जबाव हमेशा दिया आतंकवाद और मित्रता साथ साथ नही चल सकते हैं।और वही हमारे वर्तमान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पापी पाकिस्तान पीएम शरीफ को एकाएक सुरक्षा ताक पर रखकर शेर की तरह उस सियार को हड्डी दिया। वो बदले में सरकार को दो साल पुरने पर पठानकोट का तोहफा और हमारे पीएम के जन्मदिन पर शरीफ को आने को तो दूर फोन तक नही किया और उपर से उड़ी जैसा जख्म दे दिया। याद होगें जब अलगाववादी दिल्ली बातचीत के लिए बुलाये थे दिल्ली का अंदोलन कितना उग्र था। नारा स्पष्ट था कश्मीर हमारा है फैसला हम करेगें और बातचीत कोई तुक नही। यानि विरोध चरम सीमा पर था। सही हो सकता है पर आज वो कहा हैं। आज खुद यहाॅ की सरकार अलगाववादी पनाहगिरी हैं और वही स्लीपसेल का काम कर रहा हैं। अंततः बिना बातचीत वापस हुआ था।संसद के दोनो सत्र कई बार हंगामे के भेट चढ़ा। लेकिन उस धुधली सोच से अब देखता हूॅ कि नियमतः जैसी तैसी सरकार वैसी ही चल रही हैं।फर्क सिर्फ शब्दों का उलटफेर हो गया।
विकास और कार्य आपकी जिम्मेदारी हैं।लेकिन विदेश नीति या देश की अंदर की नीति वही हैं। कश्मीर 370 और अन्य गंभीर मुद्दे क्या हुआ ?


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नोट : लेखक स्वतंत्र विचारक व युवा शिक्षक हैं

By Rishav Mishra Krishna

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