भागलपुर : भागलपुर जंक्शन गायब हो गया है। यात्री उसे ढूंढ़ रहे हैं। इधर-उधर ताक रहे हैं। ताका-झांकी के बाद भी उन्हें भागलपुर जंक्शन नहीं मिलता। आखिर में पान वाले रणधीर से पूछते हैं। भैया… भागलपुर जंक्शन देखे हो क्या? किधर है? रणधीर कहता है… हां, वो रहा होर्डिंग के पीछे। जी हां। यह सुनने में अटपटा जरूर लग रहा है, लेकिन अभी हाल स्टेशन भवन और परिसर का कुछ ऐसा ही है। होर्डिंग की भीड़ में भागलपुर जंक्शन कहीं गुम हो गया है। होर्डिंग की भीड़ इतनी है कि इतना बड़ा भागलपुर जंक्शन भी बाहर से नजर नहीं आता। बड़ी बात यह है कि जमीन रेलवे की है और होर्डिंग नगर निगम लगवा रहा है।
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सिल्क सिटी के नाम से मशहूर भागलपुर का भागलपुर जंक्शन होर्डिंग की भीड़ में इस कदर गुम हो रहा है कि इसकी पहचान छिपने लगी है। बाहर से आने वाले लोग होर्डिंग की भीड़ में भागलपुर जंक्शन को तलाशते कुछ ऐसे ही घूम रहे हैं। आलम यह है कि मुख्य स्टेशन भवन होर्डिंग की भीड़ में पूरी तरीके से छिप गया है। बड़े-बड़े और विशालकाय होर्डिंग भागलपुर स्टेशन को अपनी गोद में छिपा रहे हैं। बताया जाता है कि जिन जगहों पर होर्डिंग लगाए गए हैं, वह जमीन रेलवे की है। रेलवे कभी भी ऐसे जगहों पर होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं देता है जिससे की स्टेशन की सुंदरता और उसकी पहचान खतरे में आए। लेकिन भागलपुर जंक्शन के बाहर होर्डिंग की भीड़ कुछ अलग ही कहानी बयां करती है।

कहा जाता है कि भागलपुर जंक्शन के बाहर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग रेलवे ने नहीं लगाई। बल्कि विज्ञापन एजेंसियों ने इसके लिए नगर निगम से अनुमति ली है। इतना ही नहीं, नगर निगम इन होर्डिंग के लिए विज्ञापन एजेंसियों से टैक्स भी वसूलता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन रेलवे की है तो नगर निगम होर्डिंग लगाने की अनुमति कैसे दे सकता है? वैसे इस सवाल से यात्रियों को कोई मतलब नहीं है। यात्री बस इतना जानना चाहते हैं कि आखिर भागलपुर जंक्शन कहां छिप गया है। बेतरतीब तरीके से रेलवे की दीवार पर लगा होर्डिंग एक एक दो महीने से नहीं बल्कि कई वर्षों से है। होर्डिंग लगाने के लिए बना लोहे का एंगल रेलवे की जमीन पर है। पर, होर्डिंग से आने वाला राजस्व नगर निगम के पास जा रहा है।
स्टेशन की खूबसूरती पर लगी नजर
रेलवे की दीवारों पर लगे होर्डिंग से जहां स्टेशन छिप गया है। वहीं, इसकी खूबसूरती पर नजर लग लग गई है। होर्डिंग नहीं रहने से बाहर से भी यात्री और आम लोग परिसर का नजारा देख लेते थे, लेकिन अभी स्टेशन से बाहर का नजारा देखना अब सपना बन गया है।
ग्रेड-ए-वन स्टेशन का हाल बेहाल
मालदा मंडल का पहला और पूर्व रेलवे का तीसरा बड़ा राजस्व देने वाला भागलपुर जंक्शन का दर्जा ग्रेड-ए-वन का है। लेकिन स्टेशन का हाल इन दिनों बेहाल है। इसका लुक से लेकर अंदर की संरचना का लोग बाहर से दीदार नहीं कर सकते हैं।
स्टेशन अधीक्षक ओंकार प्रसाद ने कहा कि रेलवे की दीवार से होर्डिंग हटाने के लिए कई बार लिखा गया है। होर्डिंग से स्टेशन भवन और सर्कुलेटिंग एरिया बाहर से नहीं दिख रहा है। इसके बाद भी निगम कुछ नहीं कर रही है।
नगर निगम के होर्डिंग प्रभारी अजय शर्मा ने कहा कि चार महीने पहले चार्ज मिला है। वैध और अवैध होर्डिंग के बारे में पता लगाया जा रहा है। अवैध होर्डिंग वालों से राशि की वसूल कर उसे हटाया जा रहा है। मार्च तक शहर में कहां-कहां होर्डिंग रहेगा, इस पर काम चल रहा है।

