सजौर के राधानगर में एक सप्ताह में गांव के 200 घरों में करीब एक हजार देसी मुर्गियों की मौत ने ग्रामीणों को हलकान कर दिया है। इसे देखने वाला कोई नहीं है। ग्रामीण बर्ड फ्लू की आशंका से सहमे हैं। वही नियमित अंतराल पर गांव में कई बत्तख व कौएं की मौत ने भी लोगों में भय का माहौल कायम कर दिया है। गांव के मो. समशूल की 25, शायरा की 2, शमीम की 6, इरशाद की 7, जुल्फकार की 30, अब्बास की 20 सत्तार की 10 समेत एक हजार मुर्गियों की मौत हुई है। पीड़ित मुर्गीपालकों ने बताया कि मुर्गियों के मल सफेद होने लगते हैं। चलने फिरने की उसकी क्षमता धीरे-धारे शिथिल हो जाती है। उसके बाद लुढ़ककर मौत हो जाती है। मौत की इस रफ्तार को देखते हुए कुछ ग्रामीणों ने इसे भोजन के इस्तेमाल में लाना चाहा, लेकिन खून काला निकलने के कारण भय से फेंक दिया।
सजौर के राधानगर में खेत में मरे कौए।
200 घरों में होता है मुर्गी पालन
गांव के 200 घरों में हजारों मुर्गियों व बतख का पालन किया जाता है। फिलहाल मौत से सभी की मांद सू ने पड़े हैं। विभाग देखने तक नहीं आया है। मुखिया संजय चौधरी ने बताया कि इसकी सूचना प्रखंड के बीडीओ को दी गई है। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि फिलहाल किसी भी पक्षी में बर्ड फ्लू का मामला सामने नहीं आया है। मुर्गियों व अन्य पक्षियों की मौत ठंड से हो रही है। उनका कहना है कि मुर्गीपालक ठंड से बचाव करें । टीम को जांच करने का निर्देश दिया गया है।

ब्लड सैंपल जांच को जाएगा कोलकाता
गोराडीह प्रखंड के पिथना गांव में पांच दिनों में 200 मुर्गे की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों को लग रह है कि बर्ड फ्लू के कारण ये मौत हो रही है। रविवार को भी कई मुर्गे की मौत हुई थी। इसकी सूचना पशुपालन विभाग के डॉक्टरों को दी गई थी। सोमवार को जिले से डाक्टरों की टीम पिथना गांव पहुंची। टीम ने मरे मुर्गे की जांच की। मुर्गे का ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए कोलकाता भेजा जाएगा।


