बिहार सरकार आशा कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देगी। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने की इसकी घोषणा की। राज्य में करीब 90 हजार आशा कार्यरत है। 12 सूत्री मांगों को लेकर जिले की आशा कार्यकर्ता की हड़ताल कर रही थीं। हड़ताल के कारण जिले के अधिकांश स्वास्थ्य केन्द्रों में ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित थीं।
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कई सालों से मानदेय की मांग कर रहीं आशा कर्मियों के आक्रोश की वजह से जहां एपीएचसी, पीएचसी ठप हो चुके थें, वहीं डिलिवरी पेसेंट को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा था। 37 दिनों से आशा कार्यकर्ताओं का धरना-प्रदर्शन-तालाबंदी जारी था। आशा कार्यकर्ता संघ का कहना था कि कुल 90 हजार आशा कर्मी अब राज्य और केंद्र सरकार से हर तरह से लड़ाई लड़ने को तैयार है।

उनका कहना था कि सरकार जब तक 18000 मानदेय देने की सरकार घोषणा नहीं करती है तब तक हड़ताल जारी रहेगी। बिहार राज्य जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ कहना था कि कर्मियों से 44 तरह का काम लिया जाता है लेकिन अल्प प्रोत्साहन राशि दी जाती है जिसकी वजह से आशा कर्मी भुखमरी के कगार पर हैं।
वर्ष 2005 से देशभर में सभी पंचायत के सभी वार्ड में आशा कार्यकर्ता कमीशन के आधार पर काम कर रही हैं, जिस पर केंद्र सरकार को 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत खर्च का वहन करना पड़ता है। वहीं देश के 17 राज्यों में आशा कार्यकर्ता को राज्य सरकार अपने निधि से वहन करती है जबकि बिहार में ऐसा नहीं है।

