पूर्णिया: सोचकर यकीन नहीं आता कि 21वीं सदी के इस आधुनिक समय में राज्य में कुछ ऐसी जगहें अभी भी मौजूद हैं जहां पढ़ने-लिखने वाली लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है. ताजा मामला जिले के श्रीनगर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां पुरूष प्रधान समाज में पढ़ाई में बेहतर होने की वजह से एक महिला को घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया.
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दरअसल, पूर्णिया के श्रीनगर की रहने वाली ममता की शादी अवधेश नामक युवक से पिछले 5 साल पहले हुई थी. अवधेश पेशे से किसान है. ममता पढ़ने में शुरू से तेज-तर्रार थी. अच्छे भविष्य और आत्मनिर्भर होने के लिए उसने सिपाही की वेकेंसी निकलने परफॉर्म भरा था.
मेहनत और ललक होने के कारण उसे नौकरी भी मिल गई. मगर जैसे ही ससुराल वालों को ये बात पता चली उन्हें बहू की सफलता रास न आई. उसके पति को पत्नी की सफलता असुरक्षित महसूस करवाने लगी और फैसला सुनाते हुए ममता को यह दिया गया कि या तो वो नौकरी करे या ससुराल में रहे.

ममता के पति और ससुराल वालों की शर्त कि अगर ममता नौकरी करती है तो उसे ससुराल छोड़ना पड़ेगा. महिला की एक बेटी भी है. उसे डर है कि कहीं बेटी से बिछड़ न जाए. उसका कहना है वह ये सब अपनी बेटी बेहतर भविष्य के लिए कर रही है. क्योंकि खेती से उसकी बेटी की पढ़ाई अच्छे स्कूल में नहीं हो सकती है.
इस बात को ममता ने परिवार परामर्श केंद्र में रखा है. केंद्र द्वारा पति के परिवार वालों को समझाने की कोशिश की गई कि आज के समय में सरकारी नौकरी का कितना महत्व है ये सभी जानते हैं. इन सबके बावजूद मानने को तैयार नहीं है. वहीं, ममता को नौकरी और परिवार दोनों चाहिए.

