किऊल-भागलपुर रूट पर इस साल मार्च महीने से इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों के दौड़ाने के रेलवे का दावा फेल हो गया। अप्रैल शुरू हो गया है, लेकिन रेलवे द्वारा इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों के चलाने की कोई सुगबुगाहट नहीं है।
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किऊल-भागलपुर के लोग 2016 से इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों के परिचालन की आस देख रहे हंै। यात्रियों को लगा था कि मार्च महीने से रूट में मेमू ट्रेनें शुरू होंगी तो वे कम समय में ही गंतव्य तक पहंुच जाएंगे। इलेक्ट्रिक इंजन के ट्रायल एवं स्पीड ट्रायल के बाद उम्मीद थी कि चुनाव से पहले इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने लगेंगी। सीआरएस द्वारा स्पीड ट्रायल के 20 दिन बीत गए लेकिन ट्रेनें नहीं दौड़ सकी। जबकि इस साल फरवरी में ही किऊल-भागलपुर के बीच 99 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। लेकिन किऊल-भागलपुर रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेन कब से चलेगी इसकी मालदा एवं दानापुर डिवीजन द्वारा कोई सूचना परिचालन विभाग को नहीं दी गई है। इसके पहले किऊल-गया के बीच 129 किलोमीटर रेल लाइन पर ट्रायल के 89 दिनों के बाद मेेमू यानी पहली बिजली की ट्रेन चली थी। किऊल-गया विद्युतीकृत रेल लाइन पर 2018 में 25 जुलाई को सीअारएस द्वारा स्पीड ट्रायल हुअा। 22 अक्टूबर को रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने मेमू का उद्घाटन किया था। इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों का परिचालन शुरू होता तो यात्रियों के यात्रा समय में भी कमी होती।


स्पीड ट्रायल के 20 दिन बीतने के बाद भी शुरू नहीं हुआ परिचालन
25 फरवरी को ही हो चुका है इलेक्ट्रिक इंजन का ट्रायल
25 फरवरी को किऊल-भागलपुर के बीच इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ा कर ट्रायल लिया गया। 18 दिन बाद 15 मार्च को सीआरएस द्वारा किऊल से भागलपुर तक इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों को चला कर स्पीड ट्रायल भी किया गया। 20 दिन बीत गए लेकिन ट्रेनों का परिचालन नहीं किया जा सका।
2016 में किऊल-भागलपुर रेल विद्युतीकरण हुआ था शुरू
2016 में पहले चरण में किऊल से जमालपुर 45 किमी तक इलेक्ट्रिक ट्रेनों को चलाना था। देरी से मार्च 2018 तक ककाम पूरा नहीं हुआ। मार्च 2019 तक किऊल से भागलपुर 99 किमी रेल लाइन पर बिजली से ट्रेनों के चलाने की योजना भी फेल हो गई।
