इस्माइलपुर पीएचसी में शुक्रवार की दोपहर को भारी मात्रा में दवा का रैपर व कटी-फटी दवाएं अस्पताल के बाहर फेंकी मिलीं। उसे देख ग्रामीण अस्पताल पर जुट गए और हंगामा खड़ा कर दिया।

ग्रामीणों ने तर्क दिया कि अस्पताल के बाहर जीवन रक्षक दवाएं फेक दी जा रहीं हैं, पर इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। दवाओं को देख ग्रामीण भड़क गए। ग्रामीण सह भाजपा नेता सुबोध यादव ने इसकी सूचना पीएचसी प्रभारी, चिकित्सा पदाधिकारी व स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियों को दी। सूचना पर पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुधांशु कुमार पहुंचे। जहां उन्होंने आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया। ग्रामीणों को उन्होंने बताया कि यह दवा एक्सपायर नहीं हुई है।

रखरखाव के कारण दवा खराब हो गई है। दवा के रैपर में दीमक लग गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर पीएचसी में कैसे दवा रखी गई थी, दवाओं में दीमक लग गया। इससे अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था की पोल खुल गई। जो दवाएं लोगों के लिए अस्पताल लाई गई, उसका लाभ यहां मरीजों को नहीं मिला। इसकी ताजा बानगी अस्पताल के गेट पर फेंकी गई दवा है।

आकलन कर भंडारपाल के वेतन से वसूल होगी दवा की कीमत : कार्रवाई के आश्वासन ग्रामीणों को गुस्सा थमा। इस्माइलपुर व गोपालपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने कहा कि दवा के मूल्य का आकलन कर भंडारपाल के वेतन से काट कर दवा की कीमत वसूल की जागी। इस्माइलपुर पीएचसी में भंडारपाल का प्रभार लिपिक विजय कुमार घोष के पास है। फार्मासिस्ट के योगदान करने के बाद से कई बार लिखित व मौखिक प्रभार देने को कहा गया है। परन्तु अभी तक उन्होंने प्रभार नहीं दिया है। इसकी सूचना वरीय पदाधिकारियों को भी दी गई है।

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By न्यूज़ डेस्क

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