एसिड अटैक पीड़िता का बनारस के प्राइवेट बर्न अस्पताल में हालत नाजुक बनी हुई है। हालत में तेजी से सुधार नहीं होने से परिवारवालों की परेशानी बढ़ गई है। पीड़िता न तो कुछ बोल पा रही है और न ही कुछ खा रही है। मंगलवार को दो चम्मच खिचड़ी दिया गया, लेकिन उल्टी कर दी। सुबह दो चम्मच नारियल का पानी और शाम को ड्रेसिंग के पहले दो चम्मच जूस दिया गया। परिवारवालों ने कहा कि ड्रेसिंग के बाद घंटे भर तक काफी परेशान रहती है। दर्द और जलन के कारण चिल्लाती है। दवा का असर होने पर शांत रहती है। ईश्वर से पीड़िता के स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। .

हिमोग्लोबीन की कमी के कारण एसिड पीड़िता को मंगलवार को एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। इसके पहले शुक्रवार को दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया था। परिवारवालों ने कहा कि बुधवार को एक यूनिट ब्लड चढ़ाया जाएगा। भागलपुर की रहनेवाली श्वेता कुमारी बनारस में पढ़ती है। पीड़िता से मिलने आई थी। छात्रा ब्लड देने के लिए तैयार हो गई है। उसने भरोसा दिलाया है कि ब्लड की कमी नहीं होने दी जाएगी।

मिलाप संस्था ने तीन लाख का दिया चेक: पीड़िता के इलाज के लिए मिलाप संस्था द्वारा 50 लाख रुपये चंदा जुटाया गया है। मंगलवार को संस्था के दो सदस्य दिल्ली से आरती गर्ग और बंगलेर से पाउर खेड़ा अस्पताल पहुंचे थे। इलाज के लिए तीन लाख रुपये का चेक दिया गया। डॉक्टर से बात कर कहा कि चार दिन के अंदर फिर 10 लाख का चेक दिया जाएगा। परिवारवालों से मिलकर संस्था के लोग वापस लौट गए। .

आज कोर्ट में दर्ज हो सकता है बयान: एसिड अटैक पीड़िता का कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस टीम को वाराणसी भेजा गया है। संभावना है कि बुधवार को वहां के सीजेएम कोर्ट में बयान के लिए अर्जी दी जाएगी। पीड़िता द्वारा पुलिस को पूर्व में दिए बयान में अंतर है। इससे जांच में आगे परेशानी हो सकती है। कोर्ट के समक्ष दिए गए बयान के आधार पर पुलिस आगे की जांच करेगी। पीड़िता ने पहले तीन नकाबपोश हमलावरों में किसी को नहीं पहचानने की बात कही थी। दोबारा बयान में पड़ोसी प्रिंस भगत की पहचान की। वाराणसी अस्पताल में 161 के बयान में प्रिंस और राजा का नाम लिया गया। इससे पुलिस को जांच में परेशानी होने लगी। डीआईजी के निर्देश पर एसएसपी ने दारोगा ओमप्रकाश को बनारस कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए भेजा है।

एसिड अटैक मामले में 10 दिन बाद भी पुलिस अज्ञात हमलावरों का पता नहीं लगा सकी है। इससे भी पुलिस को जांच में परेशानी हो रही है। घटना के बाद से गंगटी इलाके के तीन संदिग्ध युवक घर से फरार हैं। पुलिस ने तीनों का पता लगाने के लिए उसके करीबी और रिश्तेदारों के घर टोह ली, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। एसआईटी का कहना है कि तीनों युवक दोषी है या नहीं, इसका सबूत नहीं मिला है, लेकिन फरार हो जाने से कई तरह के संदेह हो रहा है। .

एसिड अटैक पीड़िता के घर से बरामद कट्टे की बैलेस्टिक जांच कराई जाएगी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एके सिंह ने मंगलवार को जांच की अनुमति दे दी है। हालांकि उन्होंने जेल में बंद आरोपी राजा यादव के ब्लड सैंपल के लिए अनुमति नहीं दी। इसके लिए पहले आरोपी से सहमति लेनी होगी। बबरगंज थानेदार मिथिलेश कुमार ने इसके लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। बिहार के डीजीपी के निर्देश पर एसआईटी एसिड अटैक मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ जांच में अबतक किसी प्रकार के वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं। डीआईजी ने पीड़िता के घर से बरामद सामान के साथ आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया था। .

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By न्यूज़ डेस्क

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