भागलपुर : अलीगंज में छात्र पर एसिड हमले की जांच कर रही एसआइटी को चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। इस मामले में जांच की दिशा अपराधियों से इतर भी घूम रही है। छात्र के परिजनों द्वारा बताए घटनाक्रम और घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्य में मेल नहीं खाने से पुलिस की जांच पर भी आरोपितों के परिवार ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऐसे में पुलिस इस मामले में काफी सतर्कता से जांच में जुटी है। ताकि सच सामने आ सके। तकनीकी अनुसंधान में कई ऐसी बातें आई है जो छात्र के परिजन की बातों से मेल नहीं खा रहे हैं। ऐसे में आरोपितों के परिजन ने भी पुलिस द्वारा प्रिंस और राजा को जेल भेजे जाने पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।
प्रिंस ने दी था छात्र के पिता को घटना की जानकारी
तकनीकी अनुसंधान और पूछताछ में पुलिस का जानकारी मिली है कि घटना के बाद छात्र के घर प्रिंस और एक अन्य पड़ोसी पहुंचे थे। पड़ोसी के कहने पर प्रिंस ने घटना की जानकारी छात्र के पिता को दी। प्रिंस ने पीड़ित छात्र के पिता के मोबाइल पर पहला फोन शाम 7.17 बजे किया। इस दौरान 14 सेंकेड बात हुई। इसके बाद छात्र के पिता ने प्रिंस के फोन पर 7.18 बजे कॉल किया। इस दौरान तीन सेकेंड बात हो पाई। फिर छात्र के पिता ने अपने जियो नंबर से प्रिंस को फोन किया। इस दौरान 17 सेंकेड बात हुई थी। इसके बाद छात्र के पिता घर पहुंचे। ऐसे में प्रिंस के परिजन का कहना है कि इस मामले में उसका बेटा दोषी कैसे है।

अलीगंज में डॉक्टर के यहां बेटी के साथ नहीं पहुंचे थे माता-पिता
जांच में कई ऐसी जानकारियां मिली है, जिससे पुलिस के जांच अलग ही दिशा में मुड़ रही है। हालांकि इस मामले में पुलिस कुछ भी बोलने से इंकार कर रही है। सूत्रों की मानें तो जांच में पुलिस को पता चला है कि घटना के ठीक बाद जब छात्र को कुर्सी पर बैठाकर अलीगंज स्थित एक निजी क्लीनिक ले जाया गया तो वहां छात्र की न ही मां पहुंची थी न पिता। बाद में दोनों को वहां फोन कर बुलाया गया। ऐसे में बड़ सवाल खड़ा होता है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद वे लोग साथ क्यों नहीं गए।
भागलपुर : फोरेंसिक टीम भी छात्र पर हुए एसिड हमले की जांच में जुटी हुई है। घटना के दूसरे दिन 20 अप्रैल को जब फोरेंसिक विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची तो परिजनों द्वारा बताई गई कहानी टीम को नहीं पची। मामले में छात्र की मां का कहना था कि बेटी का हाथ पकड़ कर उस पर एसिड डाला गया। इसके बाद बेटी हॉल में गिरकर छटपटाने लगी। तब जलन कम करने के लिए उसे दूध लगाना शुरू किया। लेकिन जब टीम जांच के लिए पहुंची तो वहां दूध का कोई अंश फोरेंसिक टीम को नहीं मिला।
पानी से पोछने की बात चली है पता : फोरेंसिक विभाग की टीम को घटनास्थल के आसपास जमीन पर एसिड का कहीं छींटा नहीं मिला। मानो घटनास्थल को पानी से पोंछ दिया गया हो। ऐसे में फोरेंसिक की प्राथमिक रिपोर्ट इस मामले में काफी महत्वपूर्ण है। पुलिस इस ¨बदु पर भी जांच कर रही है कि एसिड हमले के बाद घटनास्थल पर इतनी सफाई क्यों थी। पुलिस ने इसके लिए घटना के दिन की कई फोटो को भी जांच के लिए फोरेंसिक को भेजेगी। ताकि बताई गई घटना और फोटो में मिलान किया जा सके।

पीड़िता, मां और पिता के बयान में है काफी विरोधाभाष : इस मामले में घटना के दिन मां के बयान और बाद में पुलिस को दिए बयान में काफी अंतर है। पीड़िता और उसके पिता के बयान से भी मां का बयान मेल नहीं खा रहा है। 19 की रात मायागंज अस्पताल में पीड़िता की मां का बयान था कि तीन नकाबपोश लड़के छत के रास्ते घर में घुसे। उसमें से एक ने उन्हें पकड़कर कट्टा सटा दिया। दूसरे ने बेटी को पकड़ा और तीसरे ने उस पर एसिड डाल दिया। उन्होंने तीनों को पहचानने से भी इंकार किया था। लेकिन दो दिन बाद उन्होंने पुलिस को बताया कि घटना के समय प्रिंस और राज यादव के साथ अन्य तीन लड़के वहां मौजूद थे। प्रिंस के कहने पर नकाबपोश बदमाश ने बेटी पर एसिड फेंक दिया।
विरोधाभाषी बयान के कारण सच्चाई लाने में हांफने लगी पुलिस : जबकि पीड़िता के पिता ने प्राथमिकी में ¨प्रस पर आरोप लगाया है कि उसने ही बेटी पर एसिड फेंका है। उसमें राजा का नाम भी नहीं है। जबकि राजा को उसके पिता, मां भाई समेत अन्य लोग भी अच्छी तरह जानते हैं। ऐसे में मामले में अलग अलग बयानों के कारण कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।


