नवादा। आपको सुनने में बड़ा अटपटा व अजूबा लगता होगा लेकिन यह कड़वा सच है कि ट्रेन रूकते हीं ताड़ी-ताड़ी की आवाज आपके कान तक गुंजता रहेगा। आप किसी ट्रेन से यात्रा कर रहे है और ट्रेन किसी स्टेशन पर रूकती है तो स्टेशन के वेन्डर पानी, केक, कोल ड्रिंक तथा चाय जैसे खाने पीने की सामान की आवाज लगाते है। लेकिन पूर्व मध्य रेल अन्तर्गत दानापुर मंडल के किउल-गया रेलखंड पर एक ऐसा जंक्षन है जहां ट्रेन रूकने के बाद प्लेटफार्म के नीचे से ताड़ी लो ताड़ी लो की आवाज गुंजने लगती है।

यह स्टेषन किउल-गया रेलखंड पर राजगीर को जोड़ने वाली तिलैया जक्षन है। जहां ट्रेन रूकते ही ताड़ी बेचने वालों की होड़ लग जाती है। महिला व पुरूष ताड़ी बिक्रेता ट्रेन के प्रथम बोगी से लेकर अंतिम बोगी तक हाथ में ताड़ी भरा लमनी और बोतल लेकर दौड़ते रहते है। यह स्टेशन वहीं स्टेशन है जो किउल-गया के साथ-साथ तिलैया-कोडरमा और राजगीर भाया बख्तियारपुर को जोड़ती है। ट्रेन पर सफर कर रहे दर्जनों यात्रियों ने बताया कि यह सब कारनामा रेल पुलिस व स्थानीय रेलकर्मी की मिली भगत से हीं होती होगी।

एक तरफ बिहार सरकार नषामुक्त बिहार बनाने के लिए शराबबंदी कानून लागू कर बिहार में शराब व ताड़ी बेचने व पीने पर पूर्णरूपेण रोक लगा दी है। बावजूद रेलवे स्टेशन पर खुलेआम ताड़ी बेचना रेल विभाग व रेल पुलिस के उपर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। बताया जाता है कि जिस ट्रेन में पुलिस का स्कॉट भी होती है, उस ट्रेन में भी ताड़ी बेचने का काम बिना रोकटोक किया जा रहा है। स्थानीय यात्री तो नहीं लेकिन दूसरे राज्य के यात्री ताड़ी को बहुत चाहत से खरीदते है और ट्रेन में हीं पी लेते है।

यहां बता दे कि तिलैया रेलवे स्टेशन पर दर्जनों महिला और पुरूष खुले रूप से ताड़ी बेचने का काम कर रहे है। बावजूद रेलकर्मी और रेल पुलिस की ओर से इनके उपर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि रेलकर्मी और रेल पुलिस की मिली भगत से हीं रेलवे स्टेशन पर खुले रूप से ताड़ी बेचने का काम किया जा रहा है। खुले रूप से तो नहीं लेकिन दबी जुबान से कुछ लोगों ने बताया कि रेलकर्मी और रेल पुलिस को ताड़ी बेचने वाले धंधेबाज प्रतिमाह बंधी बंधाई मोटी रकम देते है।

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By न्यूज़ डेस्क

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