दो जूलाई को होगा महायज्ञ का समापन
नवगछिया: कथा को हमें एकाग्रचित होकर सुनना चाहिए और जितने विश्वास के साथ हम भगवान की कथा सुनते हैं उतना ही फल हमें अधिक प्राप्त होता है और दुनिया में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो भगवान की कथा से बड़ा है। अठारह पुराणों में देवी भागवत् पुराण उसी प्रकार सर्वोत्तम है, जिस प्रकार नदियों में गंगा, देवों में शंकर, काव्यों में रामायण, प्रकाश स्रोतों में सूर्य, शीतलता और आह्लाद में चंद्रमा, क्षमाशीलों में पृथ्वी, गंभीरता में सागर और मंत्रों में गायत्री आदि श्रेष्ठ हैं।
यह पुराण श्रवण सब प्रकार के कष्टों का निवारण करके आत्मकल्याण करता है। अत: इसका पारायण सभी के लिए श्रेष्ठ है।सूतजी बोले-देवी भागवत की कथा-श्रवण से भक्तों और श्रद्धालु श्रोताओं को ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। मात्र क्षणभरकी कथा-श्रवण से भी देवी के भक्तों को कभी कष्ट नहीं होता। सभी तीर्थों और व्रतों का फल देवी भागवत के एक बार के श्रवण मात्र से प्राप्त हो जाता है। सतयुग, त्रेता तथा द्वापर में तो मनुष्य के लिए अनेक धर्म-कर्म हैं, किंतु कलियुग में तो पुराण सुनने के अतिरिक्त कोई अन्य धार्मिक आचरण नहीं है।

कलियुग के धर्म-कर्महीन तथा आचारहीन मनुष्यों के कल्याण के लिए ही श्री व्यासजी ने पुराण-अमृत की सृष्टि की थी। उक्त बातें नवगछिया अनुमंडल के रंगरा प्रखंड स्थित भवानीपुर पंचायत के पुरानी बुढ़िया काली मंदिर के प्रांगण में नौ दिवसीय श्री श्री 108 श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्री मद् देवी भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के सातवें दिन संगीतमय कथा व्यास परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज नें कहीं।संगीत कलाकार के द्वारा भक्ति भजन पर श्रोता झूमने पर मजबूर हो गये ।

कथा के दौरान झांकी चित्रण ने श्रोताओ का मन मोह लिया । प्रत्येक दिन मंडप परिक्रमा में श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ती जा रही है। इस नौ दिवसीय महायज्ञ से वातावरण भक्ति मय हो चुका है। प्रत्येक दिन दुर दराज से श्रोतागण महायज्ञ में पहुंच रहे है। जूनागढ़, हरिद्वार, अयोध्या एवं उज्जैन से देश के कौने-कौने से आए नागा एवं अखाड़ा साधुओ का अद्भुत संगम भी देखने को मिला ।

रविवार को सैकडो की संख्या में महिला एवं पुरूषो ने गुरू दीक्षा प्राप्त किया । इस मौके पर अनिमेष सिंह कुन्दन बाबा मनवानंद जी अनिरुद्ध बाबा पंडित मुकेश शास्त्री एवं यज्ञ कमिटी के अध्यक्ष समेत सभी सदस्य मौजूद थे।


