श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का विशेष संयोग है। ज्योतिष का दावा है कि जन्माष्टमी पर द्वापर जैसा संयोग दोहराया जा रहा है। इस बार अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में सूर्य और चंद्रमा के उच्च होने से अद्भुत संयोग बन रहा है। बाबा कुपेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी विजयानंद शास्त्री ने बताया कि इस दिन भगवान कृष्ण की आराधना से विशेष फल प्राप्त होता है। सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होने का योग है। इस विशेष योग को पुराणों में तीन जन्मों के पापों से मुक्ति वाला बताया गया है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। इसलिए भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना शुभ माना गया है। उन्होंने कहा कि रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि के साथ सूर्य और चन्द्रमा ग्रह भी उच्च राशि में है। माना जा रहा है कि जिस प्रकार के योग में भगवान श्रीकृष्ण का द्वापर युग में प्राकट्य हुआ था, वैसे योग में 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।.

रात 12.09 बजे प्रवेश करेगा रोहिणी नक्षत्र: जगन्नाथ मंदिर के पुजारी सौरभ मिश्रा ने बताया कि काशी पांचाग के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त को रात्रि 12 बजकर नौ मिनट में प्रवेश करेगा, जो 24 अगस्त की रात्रि 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। .

1. जन्मोत्सव की तैयारी शुरू जन्माष्टमी की मंदिरों में तैयारी शुरू हो गयी है। जगन्नाथ मंदिर, बूढ़ानाथ मंदिर, संकटमोचन दरबार, मोहरी मंदिर, रंगनाथ मंदिर आदि जगहों पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है।

2. दो दिन मनेगी जन्माष्टमी पुजारी ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी 23 व 24 अगस्त को मनेगी। उदया तिथि को मानने वाले 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने का तर्क दे रहे हैं। जबकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस आधार पर गृहस्थ 23 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनायेंगे। वहीं वैष्णव लोग 24 अगस्त को जन्मोत्सव मनायेंगे।

3. ’ विशेष योग को तीन जन्मों के पापों से मुक्ति वाला बताया गया ’ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था

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By न्यूज़ डेस्क

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