राज्य सरकार ने शराबबंदी के बाद अब हर तरह के पान-मसाला पर पाबंदी का बड़ा फैसला किया है। पान-मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण, वितरण और परिवहन पर पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। खाद्य संरक्षा आयुक्त संजय कुमार ने जन स्वास्थ्य के हित में अभी 12 ब्रांड के पान-मसालों की बिक्री पर रोक लगाई है। कुछ अन्य ब्रांडों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर आगे कार्रवाई की जाएगी। बैन की सूचना सभी डीएम, एसपी, कमिश्नर और सिविल सर्जनों को देने के साथ इसे कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
तंबाकू या गुटका-पान मसाला पर पहले से ही है प्रतिबंध
पान मसालों के प्रतिबंधित 12 ब्रांड
प्रतिबंधित ब्रांडों में रजनीगंधा, राज निवास, सुप्रीम पान पराग, पान पराग, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, पैशन, कमला पसंद और मधु पान-मसाला शामिल हैं। कुछ अन्य ब्रांडों पर उनके नमूने की जांच की रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।


मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में जुलाई में हुई बैठक में दिए गए निर्देश के आलोक में खाद्य संरक्षा आयुक्त ने यह फैसला किया है। पिछले वर्ष 25 अक्टूबर से राज्य में किसी भी तरह के तंबाकू या निकोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ के उत्पादन, बिक्री, वितरण, परिवहन और भंडारण पर एक साल के लिए प्रतिबंध है। गुटका और तंबाकूयुक्त किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ और पान मसाला पर सूबे में इसलिए पूर्ण प्रतिबंध है क्योंकि उनके सेवन से लोगों को कैंसर समेत कई अन्य जानलेवा बीमारियां हो रही थी।

नमूनों की जांच में प्रतिबंधित मैग्नीशियम कार्बोनेट मिला
खाद्य संरक्षा आयुक्त ने यह प्रतिबंध विभिन्न जिलों से लिए गए पान मसाला के नमूनों की जून से अगस्त महीने में हुई जांच में मैग्निशियम कार्बोनेट की मात्रा पाए जाने के कारण लगाया है। मैग्निशियम कार्बोनेट से हृदय सहित अन्य बीमारियां होती हैं। फूड सेफ्टी एक्ट 2006 में दिए मानक के मुताबिक मैग्नीशियम कार्बोनेट मिलाना प्रतिबंधित है।
खैनी के विकल्प पर भी विचार : मुख्य सचिव ने कहा कि पान मसाला पर सख्ती से प्रतिबंध लगेगा। अगले सप्ताह समीक्षा होगी। बिहार में बड़े पैमाने पर खैनी की खेती होती है। उसके विकल्प पर भी विचार किया जाएगा।

5 अप्रैल 2016 को बिहार बना था ड्राई स्टेट, लागू की गई थी पूर्ण शराबबंदी
5 अप्रैल 2016 को बिहार ड्राई स्टेट बन गया था। सरकार ने 1 अप्रैल को देसी शराब की बिक्री पर रोक लगाई थी। इसके पांचवें ही दिन शराबबंदी के पक्ष में जबरदस्त माहौल देख कर विदेशी शराब की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ा। 5 अप्रैल को कैबिनेट के इस फैसले की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद घोषणा की थी। तब से राज्य में शराब की बिक्री व सेवन पर बैन है।
ताजा पाबंदी से होगा 200 करोड़ का घाटा
तंबाकू उत्पादों पर पाबंदी से राज्य को 200 करोड़ का सालाना घाटा होगा। असंगठित रूप से इन उत्पादों की सप्लाई राज्य में कई सूत्रों से की जा रही है।

