बुधवार को नवजात की मौत पर पीएचसी में हुए उत्पात के बाद सभी कर्मचारी डरे सहमे हैं। इसकी ताजा बानगी गुरुवार को देखने को मिली। पीएचसी में दूसरे दिन इमरजेंसी छोड़ ओपीडी समेत अन्य सेवाएं बंद रहीं। कर्मचारी ड्यूटी पर तो आए, पर किसी ने अपने-अपने काउंटर पर बैठने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। नतीजा यह रहा कि इमरजेंसी के अलावा इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे लोगों को वापस लौटना पड़ा।
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घटना के दिन तो पुलिस ने एक सेक्शन पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी थी, जो गुरुवार सुबह हटा ली गई। इंस्पेक्टर एनएस चौहान ने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद पुलिस फोर्स हटा ली गई। इससे कर्मचारी और डर गए। कर्मचारी किसी तरह पीएचसी परिसर में इधर-उधर दिन काट कर अपनी ड्यूटी पूरा किए। वर्तमान में सीजनल बीमारी की लगातार लोग शिकार हो रहे हैं, जो इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

इस मामले में सीएस विजय कुमार ने बताया कि घटनाक्रम की रिपोर्ट पीएचसी प्रभारी से मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ओपीडी बंद रहने की जानकारी नहीं है। पीएचसी प्रभारी से पूछा जाएगा, जहां तक सुरक्षा की बात है, 20 सितंबर तक पीएचसी पर एक सेक्शन फोर्स की तैनाती कराई जाएगी। इसके अलावे नवगछिया, रंगरा, नारायणपुर समेत जिले के सभी सुरक्षा गार्ड विहीन पीएचसी में उक्त तिथि तक सुरक्षा गार्ड की तैनाती कर दी जाएंगी। इसके लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है।

