भागलपुर शिक्षा विभाग में 52 लाख का कथित घोटाला, कागजों पर बनी फर्जी शिक्षिका के खाते में भेजी गई रकम

भागलपुर। शिक्षा विभाग की वेतन भुगतान व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विभागीय रिकॉर्ड में तनुश्री नाम की ऐसी शिक्षिका का विवरण तैयार किया गया, जो संबंधित विद्यालय में कभी नियुक्त ही नहीं हुई थी। इसके बावजूद उसके नाम पर PRAN नंबर और बैंक खाता तैयार कर वेतन के नाम पर सरकारी राशि भेजी जाती रही।

जांच के अनुसार, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच कथित तौर पर करीब 52 लाख रुपये खाते में भेजे गए, जिनकी निकासी भी कर ली गई। इसके बाद करीब 46 लाख रुपये और भेजने की कोशिश हुई, लेकिन बैंक ने खाते पर रोक लगा दी। तीसरी बार 73 लाख रुपये भेजने का प्रयास भी बैंक ने अस्वीकार कर दिया।

मामले में एक कंप्यूटर ऑपरेटर, उसकी पत्नी और एक संचिका प्रभारी की कथित भूमिका की जांच की जा रही है। विभागीय स्तर पर कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी भी शुरू की गई है।

जांच में सामने आया काल्पनिक शिक्षिका का मामला

शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर के जिम्मे वेतन, एरियर और भुगतान संबंधी एडवाइस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण काम थे। उसके खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद जब वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई, तो तनुश्री नाम की शिक्षिका के खाते में रकम भेजे जाने का पता चला।

अधिकारियों ने संबंधित विद्यालय के प्रधान से जानकारी ली, तो पता चला कि इस नाम की कोई शिक्षिका वहां कभी नियुक्त नहीं हुई थी। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में उसका विवरण मौजूद था और उसके नाम पर वेतन भुगतान किया जा रहा था।

इस खुलासे के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिकॉर्ड किसने तैयार किया और भुगतान की प्रक्रिया को किस स्तर पर मंजूरी मिली।

दूसरे व्यक्ति के पैन नंबर से PRAN बनाने का आरोप

जांच में आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर ने किसी अन्य व्यक्ति के पैन नंबर का इस्तेमाल कर काल्पनिक शिक्षिका के नाम पर PRAN यानी परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर तैयार कराया।

PRAN राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत जारी होने वाली विशिष्ट पहचान संख्या है। आरोप है कि इस पहचान और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खुलवाया गया। इसके बाद वेतन भुगतान की सूची में कथित फर्जी शिक्षिका का नाम शामिल कर सरकारी राशि खाते में भेजी जाने लगी।

52 लाख रुपये की निकासी, दूसरे खाते में ट्रांसफर की भी जांच

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये खाते में भेजे गए। आरोप है कि इस रकम की निकासी कर ली गई। जांच के दौरान एक महिला के जनधन खाते में भी बड़ी राशि ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।

इसी आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर की पत्नी की कथित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, संबंधित लोगों की भूमिका और धन के अंतिम इस्तेमाल की पुष्टि जांच तथा बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।

46 लाख और 73 लाख रुपये के भुगतान पर बैंक ने लगाई रोक

मामले में सामने आया कि कथित तौर पर अगस्त 2026 में करीब 46 लाख रुपये खाते में भेजने का प्रयास किया गया, लेकिन बैंक ने खाते पर होल्ड लगा दिया। इसके बाद 73 लाख रुपये भेजने की कोशिश की गई, जिसे भी बैंक ने अस्वीकार कर दिया।

इससे बड़ी राशि का भुगतान रुक गया। अब जांच में यह पता लगाने की जरूरत है कि इन भुगतानों के लिए किस स्तर पर प्रक्रिया पूरी की गई थी और फर्जी रिकॉर्ड होने के बावजूद पहले इसकी पहचान क्यों नहीं हो सकी।

नए डीईओ ने कंप्यूटर ऑपरेटर को किया सेवामुक्त

बताया गया है कि कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ पहले भी शिकायतें मिल रही थीं। मामले की जांच के बाद नए जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार ने उसे सेवामुक्त कर दिया।

इसके बाद वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल में कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर राशि भेजे जाने का मामला सामने आया। विभाग अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

प्राथमिकी की तैयारी, कई बिंदुओं पर जांच जरूरी

प्रमंडलीय शिक्षा उपनिदेशक भागलपुर सुभाष गुप्ता ने बताया कि फर्जी शिक्षक बनाकर राशि की निकासी का मामला सामने आया है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जल्द प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात भी कही है।

जांच में अब यह स्पष्ट करना होगा कि फर्जी रिकॉर्ड किसने तैयार किया, PRAN और बैंक खाता खोलने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, भुगतान को किस स्तर पर स्वीकृति मिली और निकाली गई रकम किन-किन खातों में पहुंची।

सरकारी वेतन प्रणाली की निगरानी पर उठे सवाल

यह मामला सरकारी राशि की कथित निकासी के साथ शिक्षा विभाग की रिकॉर्ड सत्यापन और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यदि किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर लंबे समय तक वेतन भुगतान होता रहा, जिसकी संबंधित विद्यालय में नियुक्ति ही नहीं थी, तो रिकॉर्ड और भुगतान की जांच व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल विभागीय जांच और प्राथमिकी के बाद ही मामले में शामिल लोगों की भूमिका, धन के लेनदेन और कथित अनियमितता की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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By न्यूज़ डेस्क

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