भागलपुर के बड़ी खंजरपुर में रहने वाली तीन बहनों के घर गुरुवार को बिजली कनेक्शन दिया गया। नौ साल के बाद तीनों बहनों के घर बल्ब जला। इसको लेकर ‘हिन्दुस्तान’ ने मुहिम चलाई थी।
जगदीशपुर सीओ सोनू भगत ने बताया कि बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया था। कनेक्शन के लिए बिजली तार, बोर्ड और बल्व की व्यवस्था की गयी। सीओ ने बताया कि रोज तैयार भोजन तीनों बहनों को उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वरोजगार से जोड़ने के लिए एनजीओ से संपर्क किया जा रहा है। पढ़ाई की भी व्यवस्था की जायेगी। तीन बहनों में गौरी और आशा आसपास के घरों में काम कर परिवार का भरण-पोषण करती है। छोटी बहन कुमकुम कक्षा छह में पढ़ती है।
कोरोना का कहर: पीएमओ सक्रिय हुआ तो तीन दिनों से भूखी बहनों को मिला खाना
लॉकडाउन के चलते दोनों बहनों का काम छूट गया है। तीन दिन भूखे रहने पर गौरी ने हेल्प लाइन के माध्यम से पीएमओ कार्यालय को जानकारी दी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। प्रशासन द्वारा तीनों बहनों को रोज खाना दिया जा रहा है। तीनों बहनों की मां अनिता देवी और भाई राहुल कुमार का 2011 में करंट लगने से मौत हो गयी थी। इसके बाद से घर में बिजली का कनेक्शन नहीं था। पिता सिनोद रजक की 2017 में ट्रेन से कटने से मौत हो गयी थी।

ये है तीनों बहनों और पीएमओ से फोन आने की कहानी
कोरोना लॉकडाउन के चलते भागलपुर के बड़ी खंजरपुर में रहने वाली तीन दिनों से भूखी तीन बहनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को फोन कर गुहार लगायी। इसके बाद दिल्ली से लेकर भागलपुर तक का प्रशासन हरकत में आया और लड़कियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गयी। बड़ी खंजरपुर स्थित विषहरी स्थान के पास तीन बहनें गौरी कुमारी, आशा कुमारी और कुमकुम कुमारी रहती हैं। पिता सनोद रजक और मां की मौत पहले हो चुकी है। एक और छोटी बहन बिंदा कुमारी मौसी के यहां रहती है।
PMO के निर्देश पर जिन तीन दिनों से भूखी बहनों की मदद करने पहुंचा प्रशासन, जानें उनकी दर्दभरी दास्तां
तीनों बहनें दूसरे के घरों में काम कर जीवन-यापन करती थीं। लेकिन कोरोना के भय और लॉकडाउन के बाद लोगों ने काम करने से मना कर दिया। घर में खाने की व्यवस्था नहीं रहने और तीन दिनों से भूखे रहने पर लड़कियों ने बीते बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को फोन कर मदद की गुहार लगायी।

जगदीशपुर सीओ सोनू भगत ने बताया कि पीएमओ ने बिहार आपदा प्रबंधन विभाग को तीनों लड़कियों को तत्काल मदद करने का निर्देश दिया। आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश पर वह लड़कियों से मिले। लड़कियां भूखी थीं। घर में खाने का सामान नहीं है। हालांकि तीनों लड़कियां स्वस्थ्य हैं। लड़कियों को भोजन के अलावा चूड़ा, दालमोट, बिस्कुट आदि दिया गया। इसके बाद तीनों बहनों को मदद मिलनी शुरू हो गई। कई सामाजिक संस्थाएं भी उनकी मदद को आगे आईं। प्रशासन की ओर से उन्हें गैस चूल्हा और सिलेंडर उपलब्ध कराया गया था। और गुरुवार को उन्हें नौ साल बाद बिजली भी मिल गई।
इनपुट:हिंदुस्तान


