वर्षों से कटाव का दंश झेल रहे गुवारीडीह में मुख्यमंत्री के आगमन से इलाके के लोगों में वहां की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगी है। रविवार काे पुरातात्विक स्थल देखने पहुंचे मुख्यमंत्री से ग्रामीणों ने गुवारीडीह बहियार और आसपास के क्षेत्रों में करीब 200 एकड़ उपजाऊ जमीन पर अपराधियों का कब्जा होने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत डीआईजी और नवगछिया की एसपी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों से किसानों के खेतों को सुरक्षित किया जाएगा। किसानों ने सीएम से शिकायत की कि कोसी के उस पार खेती की एवज में अपराधी दो हजार रुपए प्रत्येक बीघा की दर से रंगदारी वसूलते हैं।

कड़ी रही सुरक्षा, बगैर पास वालाें काे अवशेष स्थल के पास इंट्री नहीं

सीएम के कार्यक्रम के दाैरान सुरक्षा काफी कड़ी रही। डीआईजी सुजीत कुमार, नवगछिया एसपी स्वप्नाजी मेश्राम खुद पल-पल की निगरानी करते रहे। आयुक्त वंदना किनी, डीएम प्रणव कुमार, एसडीओ अखिलेश कुमार समेत अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी भी वहां मुस्तैद रहे। इससे पूर्व विधायक ई. कुमार शैलेन्द्र एवं वॉल बैडमिंटन संघ नवगछिया के जिला सचिव ज्ञानदेव कुमार ने स्मृति चिह्न देकर सीएम काे सम्मानित किया। पूर्व मेयर दीपक भुवानिया भी वहां पहुंचे। सीएम के कार्यक्रम में बगैर पास वाले लोगों को प्रवेश नहीं दिया गया। वहां पहुंचे लाेगाें का अवशेष स्थल से वापस लौटने के दौरान सीएम ने अभिवादन किया।

बाॅल बैडमिंटन खिलाड़ियों ने सीएम को सौंपा ज्ञापन, नियुक्ति की मांग

बाॅल बैडमिंटन संघ के खिलाड़ियों ने भी सीएम काे एक मांग पत्र साैंपा। जिसमें बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ी नियुक्ति नियमावली के तहत खिलाड़ियाें काे नाैकरी देने की मांग की गई। संघ के जिला उपाध्यक्ष शमीम उर्फ मुन्ना, जिला सचिव बबलू मोदी व राष्ट्रीय खिलाड़ी मुकेश पौद्दार आदि ने सीएम से यह मांग की।

खुदाई के लिए टीएमबीयू में हाेगी विशेष ट्रेनिंग

बिहार विरासत विकास समिति टीएमबीयू के प्राचीन इतिहास व पुरातत्व विभाग में शिक्षकाें काे खुदाई की बारीकियाें काे समझाने के लिए सात दिन की विशेष ट्रेनिंग देगा। प्राचीन इतिहास व पुरातत्व विभाग के हेड डॉ. बीएल चौधरी, डॉ. पवन शेखर, डॉ. दिनेश गुप्ता और एसएम कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य व इतिहास के जानकार डॉ. रमन सिन्हा व डॉ. शिव शंकर पारिजात भी पुरातात्विक स्थल पर पहुंचे थे।

शुंग व कुषाण काल के हो सकते हैं अवशेष

अवशेष शुंग और कुषाण काल के हो सकते हैं। बिहार विरासत समिति के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार चौधरी ने बताया कि छठी शताब्दी के बाद से सभ्यता शुरू हो गई थी। गुवारीडीह में मिले अवशेष पर भागलपुर विवि की टीम ने काम किया है। जो भी सामग्री मिली है ब्लैक एंड रेड वेयर का शेप है। ताम्र के जो आकार हैं व ईंट की लंबाई-चौड़ाई देखकर लग रहा है कि शुंग-कुषाण के समय का हो सकता है।

अविनाश ने मित्रों की सहायता से टीले की शुरू की थी खुदाई

ग्रामीण अविनाश कुमार ने वहां टीले का सर्च अभियान शुरू किया था। उन्हाेंने बताया कि विकास यात्रा के दाैरान सीएम ने एक टीले की खुदाई का निर्देश दिया था। उससे कई पुरानी चीजें निकली थीं। उसी से मन में विचार आया कि उसकी जमीन पर भी टीला है, हो सकता है कि उस टीले पर भी पुरावशेष हो। इसके बाद मित्रों की सहायता से सर्च अभियान शुरू किया था और कई महत्वपूर्ण पुरावशेषों को सहेजा। 33 वर्षीय अविनाश ने जेपी कॉलेज से इंटर तक की पढ़ाई की है।

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By न्यूज़ डेस्क

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