जाह्नवी चौक से इस्माइलपुर तक रिंग बांध का निर्माण कार्य शुरू हुए दो माह बीच चुका है। लेकिन अब तक किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। किसान मुआवजे के लिए अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं। किसानों को इस बात का भय सता रहा है कि उनको मुआवजा मिलेगा या नहीं। शनिवार को इस्माइलपुर प्रखंड के छोटी परबत्ता के किसान जोगिंदर मंडल, शंभु यादव, दिनेश मंडल, राजेन्द्र मंडल, निवास मंडल, पप्पू मंडल, उपेंद्र मंडल, छंगूरी मंडल सहित दर्जनों किसान अनुमंडल कार्यालय पहुंचे और एसडीओ से मिलकर मुआवजे की राशि की भुगतान करने की मांग की।
किसानों ने कहा कि रिंग बांध का निर्माण शुरू हो गया है। तब अफसरों ने अविलंब भुगतान करने का आश्वासन दिया था। मगर अब तक हमें सिर्फ नोटिस दी गई है। किसानों ने कहा कि 2018 में इस्माइलपुर से मंधत टोला तक रिंग बांध का निर्माण किया गया था। विभाग ने उन किसानों को भी मुआवजा नहीं दिया है। राजद नेता सह छोटी परबत्ता निवासी संजय मंडल ने कहा कि परबत्ता मौजा में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है।

वह जमीन बसोबास की है। किसानों को बसोबास जमीन के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। साथ ही पूर्व में जिन किसानों के खेत से रिंग बांध में मिट्टी भराई की गई है उन्हें भी भुगतान नहीं किया गया है। एसडीओ ने मार्च तक सभी किसानों को मुआवजा की राशि भुगतान कराने का आश्वासन दिया।
किसान बोले, जल्द भुगतान नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन
इस्माइलपुर के किसानों ने कहा कि अफसरों के आश्वासन पर हमने अपनी जमीन दे दी। इसके बाद रिंग बांध का निर्माण भी शुरू हो गया। लेकिन अब अधिकारी मुआवजा देने में टाल-मटोल कर रहे हैं। हमने अपनी उपजाऊ जमीन दे दी। उस जमीन पर खेती कर हम जीवन यापन करते थे। मुआवजे की राशि मिल जाती तो हम कोई धंधा करते। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर इस माह के अंत तक भू-अर्जन विभाग मुआवजे का भुगतान नहीं करेगा तो हम आंदोलन को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि मार्च माह तक अगर किसानों को मुआवजा नहीं मिलता है तो इसके बाद आंदोलन आरंभ किया जाएगा।


