गुप्त नवरात्र इस वर्ष 11 जुलाई से शुरू हो रही है। आषाढ़ माह की नवरात्र इस बार आठ दिनों की होगी। एक दिन कम होने की वजह चतुर्थी और पंचमी तिथि एक ही दिन का होना है। नवरात्र का शुभारंभ पुष्य नक्षत्र के शुभ योग में होगा और अबूझ मुहूर्त जैसे दिवस यानी भड़ली नवमी पर 18 जुलाई को समापन होगा। आचार्य पंडित दयानंद पाण्डेय ने बताया कि गुप्त नवरात्र में की गई देवी की आराधना का विशेष पुण्य फल मिलता है। पंडितों के अनुसार 11 जुलाई से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि में व्रत रखकर देवी दुर्गा और काली की आराधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में देवी के बीज मंत्र और सप्तशती पाठ के साथ हवन यज्ञ किया जाए तो वातावरण शुद्ध होगा, वहीं साधकों के आत्मबल में भी वृद्धि होगी। आषाढ़ माह में जब बारिश के दिन रहेंगे, तमाम तरह के संक्रमण फैलने की आशंका रहेगी। इससे बचने के लिए औषधीय जड़ी-बूटी युक्त हवन सामग्री का उपयोग करना बेहतर होगा।
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11 जुलाई को पुष्य नक्षत्र से शुभारंभ और समापन भड़ली नवमीं पर
साल में होते हैं चार नवरात्र : साल में चार नवरात्रों में दो प्रकट और दो गुप्त रहती हैं। प्रकट में एक चैत्र तो दूसरी अश्विन माह में शारदीय नवरात्र कहलाती है। इसी तरह गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ माह में होती हैं। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के साथ तांत्रिक 10 महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती है। तांत्रिक पूजा के लिए गुप्त नवरात्रि का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रि से अधिक होता है।
पूजा करने की विधि : स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा का थाली सजाएं। मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें। माता को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है। सरसों के तेल से दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए। अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें। आखिरी दिन माता की पूजा के बाद घट विसर्जन करें।

नवरात्र में यह उपाय करें
सुबह-शाम दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। , दोनों वक्त की पूजा में लौंग और बताशे का भोग लगाएं। , मां दुर्गा को सदैव लाल रंग का पुष्प ही चढ़ाएं। , गुप्त नवरात्रि की अपनी पूजा के बारे में किसी को न बताएं। ऐसा करने से आपकी पूजा और ज्यादा सफल होगी।
तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना के लिए विशेष महत्व
इन गुप्त नवरात्रि में आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना के लिए विशेष महत्व होता है। गुप्त नवरात्रि में व्यक्ति 10 महाविद्याओं का ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करता है। ऐसी मान्यता है कि तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है। इस नवरात्रि में साधक मां आदिशक्ति की दस महाविद्याओं की पूजा गुप्त रूप से किया जाता है।

