भागलपुर। इस साल ताइवान के पपीते का स्वाद भागलपुरवासियों को मिलेगा। जिले के चार प्रखंडों में ताइवानी पपीते की खेती होगी। इस महीने सेंटर आफ एक्सीलेंस देसरी वैशाली से पौधा पहुंच जाएगा। भागलपुर पौधा पहुंचने के बाद किसानों के बीच वितरित किया जाएगा। 6.42 हेक्टेयर में पपीते की खेती होगी। पपीते की खेती करने वाले किसानों का चयन कर लिया गया है। कहलगांव व बिहपुर के चार-चार किसान पपीते की खेती करेंगे। बिहपुर में 6.50 एकड़ में पपीते की खेती होगी। जगदीशपुर व शाहकुंड प्रखंड में एक-एक किसान पपीते की खेती करेंगे।
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एक हेक्टेयर में लगेगा 25 सौ पौधा
एक हेक्टेयर में 25 सौ ताइवानी पपीता लगेगा। एक पौधे की कीमत 20 रुपये पड़ता है, लेकिन किसानों को अनुदान दर पर पौधा उपलब्ध कराया जाएगा। अनुदान के रूप में पहले साल किसानों को 33750 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगा। दूसरे साल 11250 रुपये मिलेगा। कहलगांव के चार किसान 6.05 एकड़ में पपीते की खेती करेंगे। बिहपुर के चार किसान 6.50 एकड़, जगदीशपुर के एक किसान एक एकड़ व शाहकुंड के एक किसान 2.50 एकड़ में ताइवानी पपीते की खेती करेंगे।
दस हेक्टेयर में होगी सहजन की खेती
जिले में दस हेक्टेयर में सहजन के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए दो समूह का गठन किया जा रहा है। पीरपैंती व कहलगांव में समूह बनाने को लेकर उद्यान विभाग के अधिकारियों की बातचीत चल रही है। पीरपैंती के सात से अधिक और कहलगांव के पांच से अधिक किसानों ने सहजन की खेती के लिए आवेदन किया है। एक समूह को पांच हेक्टेयर में सहजन की खेती करने की सुविधा मिलेगी। एक हेक्टेयर में 1600 पौधा लगेगा। एक हेक्टेयर के लिए पहले साल 27750 रुपये अनुदान मिलेगा। 90 प्रतिशत पौधा जीवित रहने पर दूसरे साल 9250 रुपये अनुदान मिलेगा।

इस साल छह हेक्टेयर से अधिक रकवा में ताइवानी पपीते की खेती होगी। किसानों का चयन कर लिया गया है। सेंटर आफ एक्सीलेंस देसरी वैशाली से पपीते का पौधा मंगाया जा रहा है। – विकास कुमार, सहायक निदेशक उद्यान
