भूत प्रेत, जिन्नदि जैसे मनुष्यों में ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य आदि जाति भेद हैं, उसी प्रकार उनकी भी जातियां या भेद सुविधानुसार किए गए हैं। इनमें भूत-प्रेत, जिन्न, ब्रहम, राक्षस, डाकिनी-शाकिनी आदि मुख्य हैं। जिनकी किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, वे भूत प्रेत बन जाते हैं।

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1. जिसका जीवन में किसी ने ज्यादा शोषण किया हो, जिनको धोखे से किसी ने ठगा या हानि पहुंचाई हो। वे बदले की भावना में भूत प्रेत योनी स्वीकार कर लेते हैं।
2. आत्महत्या या जहर देकर जिनकी हत्या हुई हो।
3. जिनकी मरते समय कोई इच्छा अतृप्त रह जाती है, वे भूत प्रेत योनी में अथवा जन्म की सुरक्षा हेतु इस योनी में जन्म लेते हैं।
4. जो पापी कामी क्रोधी और मूर्ख होते हैं, भूत प्रेत बन जाते हैं।

प्रेत बाधाग्रस्त व्यक्ति की पहचान:– वास्तव में जो व्यक्ति प्रेत बाधित होता है उसकी आंखे स्थिर अधमुंदी और लाल रहती हैं। शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होता है। हाथ पैर के नाखून काले पड़े होते हैं। भूख बिलकुल कम लगती है या फिर बहुत अधिक भोजन करता है। नींद आती ही नहीं या आती भी है तो बिलकुल कम। स्वभाव क्रोधी जिद्दी उग्र और उद्वंड हो जाता है। प्यास अधिक लगती है। शरीर से दुर्गंध और पसीना निकलता है।

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By Rishav Mishra Krishna

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