कोसी, सीमांचल और पूर्व बिहार में बाढ़ को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सुपौल जाकर कोसी नदी के तटबंध पर विभाग द्वारा कराये जा रहे बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों का निरीक्षण कर चुके हैं. वहीं, भागलपुर में चारा, दवाई, बाढ़ राहत केंद्र, राशन-भोजन, आशियाना के लिए प्लास्टिक का टेंडर फाइनल हो चुका है. साथ ही भागलपुर जिला आपदा प्रबंधन शाखा को सदर, नवगछिया और कहलगांव से नावों का प्रस्ताव आ गया है. नाव मालिकों के साथ 15 जून तक इकरारनामा पूरा करने की कार्रवाई की जा रही है.

Flood: टपुआ गांव.

बाढ़ सुरक्षात्मक और कटाव निरोधक कार्यों को समय पर गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के विभाग ने प्रतिबद्धता जतायी है. इसके लिए भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड में गंगा नदी के किनारे लत्तीपुर-नारायणपुर जमींदारी बांध पर कटाव निरोधक कार्य कराया जा रहा है. मानसून से पहले तटबंधों को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, एंटी फ्लड स्लुइस गेट जल के प्रवाह को नियंत्रित कर बाढ़ के प्रभाव को कम करने में काफी कारगर होता है. इसके लिए भागलपुर के नवगछिया में जाह्नवी चौक से इस्माइलपुर तटबंध के 8.74 किमी पर एंटी फ्लड स्लुइस गेट का काम कराया जा रहा है.

Flood: महानंदा बायां तटबंध.

सुपौल जिले के पूर्वी कोसी तटबंध पर लालमन पट्टी और सतन पट्टी में कटाव निरोधक कार्यों को पूरा कर लिया गया है. वहीं, कटिहार के प्राणपुर प्रखंड में महानंदा बायां तटबंध के 19.00 किमी से 21.15 किमी के बीच कटाव निरोधक कार्य जल्द ही पूरा हो जायेगा. वहीं, महत्वाकांक्षी पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के अंतर्गत मधुबनी जिले में उग्रनाथ शाखा नहर पर वाटर फाल का निर्माण कराया जा रहा है.

Flood: लत्तीपुर-नारायणपुर जमींदारी बांध.

भागलपुर जिले में पीरपैंती प्रखंड के टपुआ गांव में गंगा के दाएं तट पर कटाव निरोधक कार्य तेजी से कराया जा रहा है. वहीं, हम बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए भागलपुर के इंग्लिश विलेज में बल्ला पिलिंग कार्य कराया जा रहा है. मालूम हो कि बाढ़ से निबटने के लिए विभागीय सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने ‘बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केंद्र’ द्वारा बाढ़ से सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक आधारित अभिनव प्रयोगों की समीक्षा कर जरूरी निर्देश दे चुके हैं.

Flood: लालमन पट्टी एवं सतन पट्टी.

इसके अलावा, पड़ोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडु की जल विशेषज्ञ सह कोसी बेसीन इनिशिएटिव की प्रोग्राम कोआर्डिनेटर डॉ नीरा श्रेष्ठा प्रधान और एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के अन्य विशेषज्ञों के साथ बाढ़ प्रबंधन और अर्ली वार्निंग सिस्टम को लेकर मुद्दों पर बातचीत हो चुकी है.

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By न्यूज़ डेस्क

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