सीबीएसई की दसवीं की विज्ञान की एक उत्तरपुस्तिका में एक छात्र ने बिना प्रश्न लिखे चार पृष्ठ में अपने घर की कहानी लिख दी और अंत में लिखा दिया ‘सर देख रहे हैं न कितनी मजबूरी है, कृपया मुझे पास कर दीजिये। इस तरह की सिर्फ एक-दो नहीं बल्कि कई कॉपियां हैं। पहली बार सीबीएसई बोर्ड में इस तरह की कॉपियां देखने को मिल रही हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह कोरोना का प्रभाव है।
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दसवीं के लिए यहां बने पांच केन्द्रों में से कुछ केन्द्रों पर विज्ञान और अंग्रेजी की कॉपियों का मूल्यांकन चल रहा है। मूल्यांकन करने वाले शिक्षक ने बताया कि पास करने का अनुरोध तो कई कॉपियों में मिला है। किसी ने लिखा है कि ‘सर बड़ी कठिन परिस्थिति से गुजरे हैं। थोड़ा स्ट्रगल रहा, फैमिली प्रॉब्लम रहा है, कृपया पास कर दीजिये। एक अंक वाले प्रश्न में एक लाइन में उत्तर लिखना है लेकिन उसे कई लाइन में लिख दिया और और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर को एक दो लाइन में लिखकर छोड़ दिया है। कुछ छात्रों ने सिर्फ प्रश्न नंबर देकर प्रश्न उतार दिया है और उत्तर नहीं लिखा है और कॉपी के अंत में पास करने का अनुरोध किया है। एक छात्र ने उत्तरपुस्तिका में 50 रुपये का नोट डाल दिया था और पास करने का अनुरोध किया था।
लिखने की आदत कम हो गई है
डीएवी स्कूल के अंग्रेजी के वरीय शिक्षक और हेड परीक्षक रहे हीरा कुमार सिंह ने कहा कि छात्रों से दो साल तक किताब और शिक्षक दूर रहे हैं। वे घर में बैठकर सुविधा परस्त हो गये हैं और उन्हें स्कूल और सुविधाओं पर निर्भरता इतनी बढ़ गई है कि कुछ काम देने पर हाथ पैर फूलने लगते हैं। उनकी पूरी पढ़ाई की जिम्मेदारी स्कूल ले लेता था लेकिन कोरोना काल में दूर रहने पर वे अपने को अकेला महसूस कर रहे हैं। बच्चों की जानकारी में गिरावट आई है।

अंग्रेजी में पहले 100 फीसदी बच्चे पास करते थे लेकिन इस बार चार फीसदी फेल हुए हैं। यह बताता है कि कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाएं और मोबाइल पर पढ़ाई जैसे वैकल्पिक प्रबंध बहुत कारगर नहीं रहा। अकेलापन के कारण भी बच्चों पर बहुत प्रभाव पड़ा। लिखने की आदम कम हो गई है। टेक्नोलॉजी इंटरटेनमेंट हो गया।
