भागलपुर । भागलपुर में वर्षों से मां काली की पूजा श्रद्धा के साथ हो रही है। यहां मां काली बुढ़िया, हड़बड़िया समेत कई नामों से जानी जाती हैं। इसके अलावा बूढ़ानाथ क्षेत्र में कुछ ही दूरी पर कई प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। इस बार शहरी क्षेत्र में सौ से अधिक तो नाथनगर में 40 से अधिक प्रतिमाएं स्थापित होंगी।

बताया गया कि शहर में मां काली को कई नामों से पुकारा जाता है। परबत्ती, इशाकचक, मोमिन टोला, हबीबपुर में मां काली बुढ़िया काली के नाम से जानी जाती हैं। रिकाबगंज में नवयुगी काली तो उर्दू बाजार व बूढ़ानाथ में मां काली को मसानी काली के नाम से पुकारा जाता है। इसके अलावा यहां बरमसिया काली, रति काली, जुबली काली, बमकाली आदि नामों से भी मां काली प्रसिद्ध हैं।

हड़बड़ी में हुआ था हड़बड़िया काली की स्थापना

हड़बड़िया काली मंदिर के सदस्य बालकृष्ण मोयल ने बताया कि मंदरोजा स्थित मंदिर में 1890 से मां काली की पूजा हो रही है। यहां जल्दबाजी में मां की प्रतिमा निर्माण होने के कारण ही इनका नाम हड़बड़िया काली पड़ा। दरअसल उस समय तेज मूसलाधार बारिश के कारण मिट्टी निर्मित प्रतिमा खराब हो गयी थी। फिर इसे हड़बड़ी में तैयार किया गया था। उधर उर्दू बाजार स्थित मसानी काली की पूजा सौ साल से अधिक समय से हो रही है। बताया गया कि यहां पर काली की प्रतिमा की स्थापना श्मशान की मिट्टी से हुई थी। इसलिए मां का नाम मसानी काली पड़ा।

बूढ़ानाथ में एक किलीमीटर की परिधि में कई प्रतिमाएं होती हैं स्थापित

काली पूजा समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार सिन्हा ने बताया कि बूढ़ानाथ क्षेत्र में काली पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। यहां एक किलोमीटर की परिधि में कई काली की प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। जिसमें बमकाली, ओमकार काली, मसानी काली, उपकार काली, बरमसिया काली, रति काली, जुबली काली, चुनिहारी टोला स्थित, आदमपुर चौक स्थित मां काली की प्रतिमाएं स्थापित होती है। उन्होंने बताया कि बूढ़ानाथ मंदिर के समीप मसानी काली का विसर्जन नाव से किया जाता है।

250 वर्षों से अधिक समय से हो रही मां की पूजा, पहली बार शोभायात्रा 1954 में निकली

महासमिति के उपाध्यक्ष जयनंदन आचार्य ने बताया कि भागलपुर में 250-300 वर्ष पूर्व से मां काली की पूजा हो रही है। यहां पहली बार प्रतिमा की शोभायात्रा 1954 में निकाली गयी। उस समय विर्सजन शोभायात्रा में मात्र 19 प्रतिमाएं शामिल हुई थीं। इसके बाद 1955 में 30 प्रतिमा शामिल हुईं। इस बार 70 से 80 प्रतिमाएं शोभायात्रा में साथ चलेंगी। उन्होंने बताया कि महासमिति के संस्थापक सदस्यों में डॉ. मेजरवार केपी सिन्हा, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, तारणी प्रसाद मिस्त्री, महावीर दास, इंदर सिंह बाबा आदि शामिल थे।

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By न्यूज़ डेस्क

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