बिहार के शिक्षा मंत्री ने रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी की तो संतों और कथावाचकों ने इसका भारी विरोध किया. टिप्पणी की आलोचना की गयी. वहीं गुरु रामभद्राचार्य ने फिर एकबार बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को निशाने पर लिया और उनकी टिप्पणी को लेकर हमला बोला. शिक्षा मंत्री को उन्होंने श्राप तक दे दिया. वहीं रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करवाने का भी दावा किया.
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रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराने का दावा
विश्व के पहले और एक मात्र अष्टवक्र मंदिर का उद्घाटन करने चित्रकूटधाम से कहलगांव पधारे तुलसीपीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि रामचरितमानस को मंत्रिमंडल से पारित करवा कर ‘राष्ट्रीय ग्रंथ’ घोषित करवाऊंगा. अपने पहले दिन के प्रवचन में उन्होंने खुले मंच से तुलसीकृत रामचरितमानस की चौपाइयों पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को आड़े हाथों लिया.
शिक्षा मंत्री को नसीहत
तुलसीपीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने रामचरितमानस की चौपाइयों का अर्थ समझे बिना ही गलत व्याख्या कर आम जनमानस को भ्रमित किया है. नासमझी में वह तारन का अर्थ मारपीट करना समझ रहे हैं, जबकि अर्थांतरण न्यास नियम के अनुसार तारन का सही अर्थ ”शिक्षण” है. गोस्वामी जी ने स्त्रियों को शिक्षण का अधिकारी बताया न कि पीटने का अधिकारी.

जगतगुरु ने शिक्षा मंत्री को चर्चा के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि यदि आपको ज्ञान का बल है, तो मेरे साथ सशर्त शास्त्र चर्चा कीजिए. यदि मैं आपको नहीं समझा पाया, तो अपना त्रिदंड गंगा में डूबो दूंगा और यदि आपको समझाने में सफल हो गया, तो आपको राजनीति और मंत्रिमंडल दोनों त्यागना होगा व आमजन से माफी मांगनी होगी.
जगतगुरु ने शिक्षा मंत्री को शाप दिया
भावावेश में जगतगुरु ने शिक्षा मंत्री को शाप भी दे डाला कि अगली बार आप चुनाव हार जायेंगे. आपने रामचरितमानस जैसे पवित्र ग्रंथ का अपमान किया है. भारतीय संस्कृति पर हमला करने का अधिकार किसी को नहीं है.
