भागलपुर। बिहार में प्रस्तावित पंचायत परिसीमन को लेकर गांवों की सियासत में हलचल तेज हो गई है। करीब दो दशक बाद होने वाले संभावित परिसीमन में बड़ी आबादी वाली पंचायतों को छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों में बांटने की तैयारी है। अगर 2011 की जनगणना के आधार पर करीब सात हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत का गठन किया जाता है, तो भागलपुर जिले में पंचायतों की संख्या मौजूदा 242 से बढ़कर करीब 348 तक पहुंच सकती है।
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इस बदलाव का सीधा असर पंचायत चुनाव के समीकरण पर पड़ेगा। मौजूदा 242 पंचायतों की तुलना में करीब 106 नई पंचायतें बन सकती हैं। इसके साथ ही जिले में मुखिया के पदों की संख्या भी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, यह फिलहाल जनसंख्या के आधार पर निकाला गया प्रारंभिक अनुमान है। अंतिम संख्या परिसीमन के दौरान भौगोलिक स्थिति, राजस्व ग्राम की अखंडता, पंचायतों की सीमा, नगर निकाय क्षेत्रों और तय किए जाने वाले अन्य मानकों के आधार पर स्पष्ट होगी।
24.35 लाख ग्रामीण आबादी बनेगी आधार
2011 की जनगणना के अनुसार भागलपुर जिले की कुल आबादी करीब 30.38 लाख थी। इसमें लगभग 24.35 लाख ग्रामीण आबादी थी। वर्तमान में जिले में 16 प्रखंड, 242 ग्राम पंचायत और 1515 गांव हैं।

यदि 24.35 लाख ग्रामीण आबादी को करीब सात हजार की औसत आबादी के आधार पर विभाजित किया जाए तो लगभग 348 पंचायतों का गणित सामने आता है। यानी वर्तमान संख्या की तुलना में करीब 106 पंचायतों की बढ़ोतरी संभव है। यह संख्या मौजूदा पंचायतों से लगभग 44 प्रतिशत अधिक होगी।
मुखिया के साथ वार्ड और पंच के पद भी बढ़ेंगे
परिसीमन का असर सिर्फ मुखिया के पद तक सीमित नहीं रहेगा। पंचायतों की संख्या बढ़ने के साथ वार्डों और पंच के पदों में भी बदलाव होगा। करीब पांच सौ की आबादी पर एक वार्ड की व्यवस्था लागू होने पर नई पंचायतों के गठन के साथ वार्डों की संख्या बढ़ सकती है।
इसी तरह करीब पांच हजार की आबादी पर पंचायत समिति क्षेत्र और करीब 50 हजार की आबादी पर जिला परिषद क्षेत्र निर्धारित किए जाने की स्थिति में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के सभी स्तरों का भूगोल बदल सकता है।
आरक्षण से भी बदलेगा चुनावी समीकरण
नई पंचायतों के गठन के बाद आरक्षण का नया चक्र भी गांवों की सियासत को प्रभावित करेगा। कई मौजूदा मुखिया अपनी वर्तमान सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं रह सकते हैं। परिसीमन के बाद किसी सीट का आरक्षण सामान्य से महिला, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति या अन्य श्रेणी में बदल सकता है।
ऐसे में संभावित परिसीमन को लेकर पंचायत स्तर पर दावेदारों और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की नजर आरक्षण के अंतिम स्वरूप पर टिकी रहेगी।
छोटी पंचायतों से विकास कार्यों की निगरानी आसान होने की उम्मीद
नई पंचायत बनने के बाद प्रत्येक पंचायत के अंतर्गत अपेक्षाकृत कम आबादी और छोटा क्षेत्र आ सकता है। इससे मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को ग्रामीणों से संपर्क रखने, योजनाओं की प्राथमिकता तय करने और विकास कार्यों की निगरानी में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
बाढ़ प्रभावित भागलपुर जैसे जिले में पंचायतों का भौगोलिक स्वरूप भी महत्वपूर्ण होगा। सड़क संपर्क, नदी-नाला, बाढ़ की स्थिति और प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखकर पंचायतों की सीमाएं तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
नई पंचायतों के गठन से सड़क, नाला, पेयजल, आवास, मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं की जरूरत के अनुसार प्राथमिकता तय करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सिर्फ आबादी के आधार पर नहीं होगा फैसला
पंचायतों की अंतिम संख्या केवल जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर तय नहीं होगी। गांवों की भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क, नदी-नाला, प्रशासनिक सुविधा और राजस्व ग्राम की सीमाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
इसलिए करीब 348 पंचायतों का आंकड़ा फिलहाल संभावित गणित है। परिसीमन की आधिकारिक प्रक्रिया और अंतिम अधिसूचना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भागलपुर में वास्तव में कितनी नई पंचायतें बनेंगी और कितने नए मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य व जिला परिषद क्षेत्र अस्तित्व में आएंगे।
