शिवरात्रि जैसे पावन दिन पर भगवान शिव की हर कोई उपासना करता है। ऐसा कहते हैं इस दिन भगवान शिव अपने उपासकों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। शिवरात्रि पर लगभग हर शिव मंदिर भक्तों से भरा हुआ रहता है। हर कोई अलग-अलग वस्तुऐं चढ़ाकर भगवान शिव को मनाने में लग जाता है। लेकिन इसी बीच कई लोग इन बातों का ध्यान नहीं रख़ते कि शिवजी को क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं ।ख़ासतौर पर न चढ़ाने वाली वस्तुओं का ध्यान रख़ना चाहिए जिससे आप अपनी पूजा का मनवाछिंत फल पा सकें।
शिव जी को ख़ासतौर पर चढ़ाई जाने वाली वस्तुएं घी, दूध, चीनी, इत्र, जल, शहद, दही, केसर,चंदन, कमल के फूल ,कनेर के फूल, बेलपत्र, भांग, धतुरे का फूल, आक हैं। इनके अलावा कुछ ऐसी वस्तुऐं हैं जिन्हें भूलकर भी शिवजी को नहीं चढ़ाना चाहिए।
हल्दी:-
हल्दी भगवान शिव को नहीं चढ़ाई जाती इसका मुख्य कारण है सौन्दर्य। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरूषत्व का प्रतीक है जिस कारण उन्हें हल्दी नहीं चढ़ाई जाती।
फूल:-
शिवजी को लाल रंग के कमल और कनेर के अलावा कोई अन्य फूल प्रिय नहीं है। ख़ासकर केतनी और केवड़े के फूल भगवान को बिल्कुल नहीं चढ़ाना चाहिए।
कुमकुम:-
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को कुमकुम(रोली) नहीं चढ़ाना चाहिए। कुमकुम सुहागन महिलाओं को चढ़ाने वाली वस्तु है और शिवलिंग पुरूषत्व का प्रतीक होने के कारण कुमकुम शिवजी को चढ़ाना वर्जित माना गया है।
शंख:-
शंखनाद भगवान विष्णु का प्रिय है लेकिन शिवजी ने ‘शंखचूर’ नामक एक असुर का वध किया था इसलिए भगवान शिव की पूजा में शंख को वर्जित माना गया है।
नारियल पानी:-
नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक नहीं करना चाहिए क्योंकि शास्त्रों में नारियल को लक्ष्मी स्वरूप माना गया है। सभी शुभ कार्यों की शुरूआत नारियल तोड़कर और सभी को नारियल का प्रसाद देकर की जाती है वहीं भगवान शिव का अभिषेक नारियल पानी से करने पर पानी पीने योग्य नहीं रहता।
तुलसी :-
तुलसी का पत्ता भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिये। इसके पीछे का कारण जलंधर की कथा है जिसमें जलंधर की पत्नी ‘वृंदा’ तुलसी का पौधा बन गई और शिवजी ने जलंधर का वध किया था इसलिए भगवान शिव को तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है।



