भागलपुर : जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में धड़ल्ले से खून की कालाबाजारी हो रही है। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल स्थित ब्लड बैंक से स्वास्थ्य केंद्रों दिए गए ब्लड जरूरतमंद मरीजों को नहीं देकर मनमानी तरीके से निजी क्लीनिकों को बेचे जा रहे हैं। इसका खुलासा कहलगांव रेफरल अस्पताल के उपयोगिता प्रमाण पत्र से हुआ है। जिसमें काफी लीपापोती की गई है। नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल ने तो अब तक उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं भेजा है। इसको देखते हुए कहलगांव रेफरल अस्पताल को ब्लड देने पर रोक लगा दी गई है।
सरकार की ओर से भागलपुर व बांका जिले के अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड स्टोर करने के लिए यूनिट स्थापित गई थी, ताकि उन अस्पतालों में गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर ब्लड आसानी से मिल सके और मरीजों के परिजन को ब्लड बैंक नहीं आना पड़े। लेकिन जरूरतमंदों को देने के बजाय ब्लड बेच दिए जा रहे हैं।

उपयोगिता प्रमाण पत्र में झोल ही झोल
दो दिन पूर्व ब्लड बैंक में हुई बैठक में सदर अस्पताल एवं बांका के अस्पतालों द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र दिए गए थे। लेकिन कहलगांव रेफरल अस्पताल ने जो उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया है उसमें झोल ही झोल है। फरवरी से मई माह के बीच कहलगांव अस्पताल को ब्लड बैंक से 18 यूनिट रक्त दिए गए। वहीं उपयोगिता प्रमाण पत्र में कहा गया है कि 10 यूनिट ब्लड एक्सपायर हो गया। लेकिन ब्लड कब एक्सपायर हुआ यह नहीं स्पष्ट किया गया है। बाकी बचे आठ यूनिट में से तीन यूनिट ब्लड बैंक को लौटाने की बात कही गई है लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है शेष पांच यूनिट आखिर किन मरीजों को दिया गया। न तो मरीजों के नाम का जिक्र किया गया है और न ही उनके गांव व पते का जिक्र किया गया है। ऐसे में अस्पतालों की व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन अस्पतालों में है ब्लड स्टोरेज यूनिट
– लोकनायक जयप्रकाश नारायण सदर अस्पताल
-कहलगांव रेफर अस्पताल
-नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल
-बांका जिले के तीन अस्पतालों में
प्रतिदिन 20 से 40 यूनिट ब्लड की खपत
जेएलएनएमसीएच में स्थित ब्लड बैंक की ओर से अस्पतालों में भर्ती मरीजों को प्रतिदिन 20 से 40 यूनिट ब्लड दिया जाता है। इतना ही नहीं निजी क्लीनिकों में भी भर्ती गंभीर मरीजों को पांच से 10 यूनिट ब्लड दिया जाता है।
इन मरीजों को देना है ब्लड
स्वास्थ्य केंद्रों में उन मरीजों को ब्लड दिया जाता है जो हादसे शिकार होते हैं और उनके शरीर में ब्लड की कमी हो। विशेषकर ऐसी गर्भवती महिलाओं को ब्लड देना होता है जिनमें हिमोग्लोबीन की मात्रा सात ग्राम से कम होती है।
ये जानकारी देनी है जरूरी
उपयोगिता प्रमाण पत्र में यह अंकित करना आवश्यक है कि जिस मरीज को ब्लड दिया गया वह कौन सी बीमारी से पीड़ित है। हिमोग्लोबीन की मात्रा कितनी थी। मरीज का नाम, घर और अस्पताल का रजिस्ट्रेशन संख्या भी अंकित करना अनिवार्य होता है।


