गोपालपुर : पिछले एक दशक से नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर, रंगरा चौक, इस्माइलपुर, खरीक व नारायणपुर प्रखंड के गंगा व कोसी के कटाव से विस्थापित परिवार राजनेताओं व प्रशासनिक पदाधिकारियों के आश्वासनों के भरोसे खानाबदोश की तरह जीने को विवश है. हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा व कोसी नदी में विलीन हो चुके हैं.
विस्थापन का दंश झेल रहे इन प्रखंडों के विस्थापित परिवार तटबंधों ,सड़कों ,रेल पटरियों व सरकारी जमीन पर अस्थाई घर बनाकर खानाबदोश की तरह पिछले एक दशक से रहने को विवश हैं. इन विस्थापित परिवारों को जनप्रतिनिधियों व सरकारी पदाधिकारियों द्वारा सिर्फ कोरा आश्वासन देकर जले पर नमक छिड़कने जैसा काम समय-समय पर किया जाता है.

हालाँकि विस्थापित परिवारों की सूची प्रशासनिक पदाधिकारियों के पास नहीं उपलब्ध नहीं है. परन्तु मोटे तौर पर नवगछिया अनुमंडल में पचास हजार परिवार गंगा व कोसी नदी के कटाव से विस्थापित होकर पुनर्वास की आस में जीवन व्यतीत कर रहे हैं. कभी सैकड़ों एकड़ जमीन के मालिक रहे परिवारों के लोग महानगरों में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करने को विवश हैं. हालाँकि पूर्व डीएम विपिन कुमार ने सहौड़ा के एक सौ पाँच विस्थापित परिवारों को बासगीत पर्चा निर्गत किया था. परन्तु अभी तक उस जमीन पर विस्थापित परिवारों को कब्जा नहीं दिलाया जा सका है. गोपालपुर प्रखंड के सैदपुर बुद्धूचक के विस्थापित परिवारों ने पुनर्वास हेतु दी जा रही जमीन को लेने से इन्कार करने के कारण फिलहाल मामला ठंढे बस्ते में चला गया है. अनुमंडल पदाधिकारी डा आदित्य प्रकाश कहते हैं कि पूरे मामले की जानकारी लेकर विस्थापित परिवारों को बसाने का प्रयास किया जायेगा.


